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पलभर में ही मौत के मुंह में समा गए मां-बेटा
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कुल्लू। मणिकर्ण के ब्रह्मगंगा नाले में बुधवार को बादल फटने से आई बाढ़ ने एक हंसते खेलते परिवार को उजाड़ दिया। बाढ़ की चपेट में आने से ब्रह्मगंगा निवासी 25 साल की पूजा और उसका चार साल को बेटा काल का ग्रास बन गए। पल भर में देखते ही देखते दोनों मां और बेटा मौत के मुंह में समा गए।
बादल फटने के बाद जब पानी मकान की तरफ आया तो सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पूजा ने अपनी पीठ पर चार साल के बच्चे को बांध लिया था। लेकिन इस बीच पीछे से पानी में बहता हुआ एक लकड़ी का बड़ा ठेला आया और इससे वह गिरने से बह गई। इस दौरान उसके ससुर ने उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन वह पानी के तेज बहाव में बह गए। यहां माहौल चीख पुकार वाला हो गया था। बाढ़ के मंजर को देखकर सबके रौंगटें खड़े हो गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। नाले का बहाव दो मकानों व कैंपिंग साइट की तरफ मुड़ चुका था। हालांकि यहां पर नाले के रौद्र रूप को देखकर कुछ लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। लेकिन चार लोग इस हादसे का शिकार बन गए। गौर रहे कि इससे पहले वर्ष 2017 में भी ब्रह्मगंगा नाले में बाढ़ आई थी। इस दौरान नाले पर बने दो पुल बह गए थे। लेकिन जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। चार साल के बाद ब्रह्मगंगा नाले का एक बार फिर रौद्र रूप देखने को मिला। इस बार बादल फटने की घटना कभी न भूलने वाले जख्म दे गई है। मणिकर्ण पंचायत के उप प्रधान चेत राम ने कहा कि बादल फटने से चार लोगों की जान चली गई है। इनमें तीन स्थानीय लोग हैं। उन्होंने कहा कि बादल फटने का मंजर भयावह था।
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बादल फटने के बाद जब पानी मकान की तरफ आया तो सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पूजा ने अपनी पीठ पर चार साल के बच्चे को बांध लिया था। लेकिन इस बीच पीछे से पानी में बहता हुआ एक लकड़ी का बड़ा ठेला आया और इससे वह गिरने से बह गई। इस दौरान उसके ससुर ने उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन वह पानी के तेज बहाव में बह गए। यहां माहौल चीख पुकार वाला हो गया था। बाढ़ के मंजर को देखकर सबके रौंगटें खड़े हो गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। नाले का बहाव दो मकानों व कैंपिंग साइट की तरफ मुड़ चुका था। हालांकि यहां पर नाले के रौद्र रूप को देखकर कुछ लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। लेकिन चार लोग इस हादसे का शिकार बन गए। गौर रहे कि इससे पहले वर्ष 2017 में भी ब्रह्मगंगा नाले में बाढ़ आई थी। इस दौरान नाले पर बने दो पुल बह गए थे। लेकिन जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। चार साल के बाद ब्रह्मगंगा नाले का एक बार फिर रौद्र रूप देखने को मिला। इस बार बादल फटने की घटना कभी न भूलने वाले जख्म दे गई है। मणिकर्ण पंचायत के उप प्रधान चेत राम ने कहा कि बादल फटने से चार लोगों की जान चली गई है। इनमें तीन स्थानीय लोग हैं। उन्होंने कहा कि बादल फटने का मंजर भयावह था।
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