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Kullu News: देवालयों के लिए निकले 30 से अधिक देवी-देवता
Thu, 29 Oct 2026 10:42 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 29 Oct 2026 10:42 AM IST
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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव संपन्न होने के बाद बुधवार को ढालपुर मैदान से 30 से अधिक देवी-देवता अपने अस्थायी शिविरों से देवालयों की ओर रवाना हुए। इसके चलते ढालपुर में दिनभर देवमय माहौल बना रहा।
सुबह 9 बजे से ही देवी-देवताओं की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया, जो शाम तक जारी रहा। देवालयों की ओर रवाना होने से पहले देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
इसके बाद अलग-अलग शिविरों में देवी-देवताओं का आपस में मिलन हुआ। देव परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक विधियां पूरी करने के बाद देवी-देवता अपने देवालयों की ओर रवाना होते रहे।
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इस बार अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में कुल 315 देवी-देवता पहुंचे। इनमें से अधिकतर देवी-देवता उत्सव के समापन अवसर पर मंगलवार को ही अपने देवालयों की ओर रवाना हो गए थे।
ये देवता उत्सव के बाद भी रहे विराजमान
उत्सव के बाद ढालपुर मैदान में अगले दिन तक विराजमान देवी-देवताओं में आदिब्रह्मा खोखण, देवता श्रृंगा ऋषि बंजार घाटी, देवता खुड्डीजल चेहनी, मार्केंडेय ऋषि नोर निरमंड, माता त्रिपुरा सुंदरी नगर, माता दोचा मोचा, माता तारा भटंति नग्गर, देवता जमलू पीज, मां चामुंडा नशाला, पंचवीर ब्राधी, सप्तऋषि बंसू, श्री कैलावीर खलोगी, वीरनाथ जनाहल, नेणा माता भुलंग, सप्त ऋषि रणपाल मौहल, वीरनाथ गौहरी खोखन, पिरडी महादेव, माता रूपासना, देवता कालीनाग, देवता बालूनाग, बिष्णु नारायण, देवता भरयाडू घाट, रुद्र वीरभद्र महादेव, चलाउड़ी बंजार, फलानी नारायण दड़का, माता कोटली सोयल, वीरकेला लोट, देवता वीर बराधी, पांचवीर खलयाणी, देवता श्री महावीर जोंगावाई, देवता वीर केला कमांद, माता पार्वती चोंग, श्री गणपति घुड़दौड़ आदि शामिल रहे।
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सुबह 9 बजे से ही देवी-देवताओं की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया, जो शाम तक जारी रहा। देवालयों की ओर रवाना होने से पहले देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
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इसके बाद अलग-अलग शिविरों में देवी-देवताओं का आपस में मिलन हुआ। देव परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक विधियां पूरी करने के बाद देवी-देवता अपने देवालयों की ओर रवाना होते रहे।
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इस बार अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में कुल 315 देवी-देवता पहुंचे। इनमें से अधिकतर देवी-देवता उत्सव के समापन अवसर पर मंगलवार को ही अपने देवालयों की ओर रवाना हो गए थे।
ये देवता उत्सव के बाद भी रहे विराजमान
उत्सव के बाद ढालपुर मैदान में अगले दिन तक विराजमान देवी-देवताओं में आदिब्रह्मा खोखण, देवता श्रृंगा ऋषि बंजार घाटी, देवता खुड्डीजल चेहनी, मार्केंडेय ऋषि नोर निरमंड, माता त्रिपुरा सुंदरी नगर, माता दोचा मोचा, माता तारा भटंति नग्गर, देवता जमलू पीज, मां चामुंडा नशाला, पंचवीर ब्राधी, सप्तऋषि बंसू, श्री कैलावीर खलोगी, वीरनाथ जनाहल, नेणा माता भुलंग, सप्त ऋषि रणपाल मौहल, वीरनाथ गौहरी खोखन, पिरडी महादेव, माता रूपासना, देवता कालीनाग, देवता बालूनाग, बिष्णु नारायण, देवता भरयाडू घाट, रुद्र वीरभद्र महादेव, चलाउड़ी बंजार, फलानी नारायण दड़का, माता कोटली सोयल, वीरकेला लोट, देवता वीर बराधी, पांचवीर खलयाणी, देवता श्री महावीर जोंगावाई, देवता वीर केला कमांद, माता पार्वती चोंग, श्री गणपति घुड़दौड़ आदि शामिल रहे।