{"_id":"65ed92add27add83f20bb4e0","slug":"loud-voice-for-tibets-independence-kullu-news-c-89-1-ssml1015-118465-2024-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: तिब्बत की आजादी के लिए बुलंद की आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: तिब्बत की आजादी के लिए बुलंद की आवाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हनुमानी बाग से ढालपुर तक निकाली रोष रैली, चीन के खिलाफ नारेबाजी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू में तिब्बत की आजादी के लिए रविवार को सैकड़ों लोगों ने आवाज बुलंद की। तिब्बतियों ने सड़कों पर उतरकर चीन के खिलाफ नारेबाजी की। नगर परिषद के वार्ड नंबर नौ हनुमानी बाग से ढालपुर तक रोष रैली निकाली। तिब्बतियों ने हनुमानी बाग, अंतरराज्यीय बस अड्डा कुल्लू (सरवरी), लोअर ढालपुर, ढालपुर चौक, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, न्यायालय परिसर, उपायुक्त कार्यालय, क्षेत्रीय अस्पताल, कॉलेज चौक, लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र से होते हुए परेड मैदान तक रोष रैली निकाली। इसके बाद तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान से 65वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस का शुभारंभ किया। इसके अलावा तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। तिब्बत सपोर्ट ग्रुप के उपाध्यक्ष पेमा नामगिल ने कहा कि 10 मार्च 1959 में तिब्बतियों ने तिब्बत पर चीनी सरकार के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया था। कुल्लू जिले में उसी दिन को याद करते हुए रविवार को रैली निकालकर तिब्बत की आजादी के लिए आवाज उठाई गई है। उन्होंने कहा कि 10 मार्च को 65वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अलावा तिब्बतियों की अहिंसक विरोध की 17वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बत में स्थानीय लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का भी अधिकार नहीं है। हमें तिब्बत के अंदर धर्म और संस्कृति की आजादी चाहिए। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू में तिब्बत की आजादी के लिए रविवार को सैकड़ों लोगों ने आवाज बुलंद की। तिब्बतियों ने सड़कों पर उतरकर चीन के खिलाफ नारेबाजी की। नगर परिषद के वार्ड नंबर नौ हनुमानी बाग से ढालपुर तक रोष रैली निकाली। तिब्बतियों ने हनुमानी बाग, अंतरराज्यीय बस अड्डा कुल्लू (सरवरी), लोअर ढालपुर, ढालपुर चौक, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, न्यायालय परिसर, उपायुक्त कार्यालय, क्षेत्रीय अस्पताल, कॉलेज चौक, लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र से होते हुए परेड मैदान तक रोष रैली निकाली। इसके बाद तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान से 65वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस का शुभारंभ किया। इसके अलावा तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। तिब्बत सपोर्ट ग्रुप के उपाध्यक्ष पेमा नामगिल ने कहा कि 10 मार्च 1959 में तिब्बतियों ने तिब्बत पर चीनी सरकार के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया था। कुल्लू जिले में उसी दिन को याद करते हुए रविवार को रैली निकालकर तिब्बत की आजादी के लिए आवाज उठाई गई है। उन्होंने कहा कि 10 मार्च को 65वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अलावा तिब्बतियों की अहिंसक विरोध की 17वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बत में स्थानीय लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का भी अधिकार नहीं है। हमें तिब्बत के अंदर धर्म और संस्कृति की आजादी चाहिए। संवाद