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कुल्लू घाटी बन सकती है ईको टूरिज्म का आदर्श केंद्र : रोहित
Fri, 19 Dec 2025 06:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 19 Dec 2025 06:44 AM IST
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कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में चल रही पर्यावरणीय साक्षरता कार्यशाला वीरवार को चौथे दिन ईको टूरिज्म और आपदा प्रबंधन पर केंद्रित रही। प्रतिभागियों ने मॉकड्रिल से आपदा से निपटने के सटीक तरीकों को सीखा। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रोहित शर्मा ने कहा कि कुल्लू घाटी हरी-भरी वादियों, ऊंचे पर्वतों और साहसिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है जो ईको टूरिज्म का आदर्श केंद्र बन सकती है। इसके लिए सतत विकास जरूरी है। अनियंत्रित पर्यटन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कुल्लू में कई साइट्स जैसे सोलंग नाला, पार्वती वैली और अन्य क्षेत्रों को ईको-फ्रेंडली तरीके से विकसित किया जा रहा है। सतत ईको टूरिज्म से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अधिकारी कुल्लू के प्रशांत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की तीव्रता बढ़ रही है इसलिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर तैयारी जरूरी है। छात्रों को सलाह दी गई कि वे अपने घरों और कॉलेज में आपदा किट तैयार रखें, जिसमें पानी, दवाइयां, टॉर्च और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हों।
फायर अधिकारी अजय शर्मा के नेतृत्व में जवानों ने आपदा से निपटने का व्यावहारिक प्रदर्शन दिखाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. राकेश राणा, डॉ. नंदिनी ठाकुर, डॉ. सोम नेगी, डॉ. मही योगेश, डॉ. शैलजा, डॉ. निर्मल चौहान, डॉ. मनीष सूद, डॉ. शीतल ठाकुर, डॉ. हीरामणि आदि उपस्थित रहे।
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जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अधिकारी कुल्लू के प्रशांत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की तीव्रता बढ़ रही है इसलिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर तैयारी जरूरी है। छात्रों को सलाह दी गई कि वे अपने घरों और कॉलेज में आपदा किट तैयार रखें, जिसमें पानी, दवाइयां, टॉर्च और महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हों।
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फायर अधिकारी अजय शर्मा के नेतृत्व में जवानों ने आपदा से निपटने का व्यावहारिक प्रदर्शन दिखाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. राकेश राणा, डॉ. नंदिनी ठाकुर, डॉ. सोम नेगी, डॉ. मही योगेश, डॉ. शैलजा, डॉ. निर्मल चौहान, डॉ. मनीष सूद, डॉ. शीतल ठाकुर, डॉ. हीरामणि आदि उपस्थित रहे।
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