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Kullu News: आग लगने के पीछे देवी-देवताओं की नाराजगी तो नहीं
Thu, 14 Dec 2023 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 14 Dec 2023 11:11 PM IST
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सैंज घाटी की बनोगी पंचायत के पटहिला गांव में लगी आग।-संवाद
सैंज (कुल्लू)। घाटी में आग की घटनाएं गांवों को तबाह कर रही हैं। देव समाज का मानना है कि इसके पीछे देवी-देवताओं की भी नाराजगी हो सकती है। देवी-देवता कारदार संघ के जिला अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि देवी-देवताओं ने पहले भी देवस्थलों से छेड़छाड़ का विरोध किया था।
सैंज घाटी में बन रही बिजली परियोजनाओं के कारण देव स्थलों में छेड़छाड़ हो रही है। इससे देवी-देवता नाराज होते हैं। मंदिरों के राख होने के पीछे देवी-देवताओं ने देवस्थलों से छेड़छाड़ को ही प्रमुख माना है। वीरवार को सैंज घाटी की बनोगी पंचायत के पटहिला गांव में मकान आग की भेंट चढ़ गए। इसमें देवता पझारी की संपत्ति को भी काफी नुकसान हुआ है।
इससे पहले भी कई मंदिर आग की भेंट चढ़ चुके हैं। ब्रह्मा देवता के कारदार भीमीराम ठाकुर, पुंडरिक के कारदार लोतम राम और लक्ष्मी नारायण देवता के कारदार जगरनाथ ने कहा कि देवताओं के पास होने वाली देवलियों में भी देवता कई बार देव स्थलों से छेड़छाड़ न करने की हिदायत दे चुके हैं। देव समाज कभी भी परियोजनाओं के पक्ष में नहीं रहा है। कारदार सुधा शर्मा और प्रबंता शर्मा ने कहा कि है कि देवता शांति चाहते हैं।
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वर्ष 2014 में शांघड क्षेत्र के अधिष्ठता देव शंगचूल ऋषि का मंदिर राख हुआ। 2015 में कोटला अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
2021 में गाड़ापारली पंचायत के मझाण गांव में आग से 25 से अधिक घर राख हो गए थे। गांव में भी देवता ढुंखरू नारायण और राई नाग का बेशकीमती सामान भी राख हो गया।
वर्ष 2005 में गाड़ापारली पंचायत के बनाउगी में देवता कशू नारायण का प्राचीन मंदिर देवता के रथ और तमाम साजो सामान के साथ राख हो गया था। नष्ट हुई संपत्ति करीब दो करोड़ रुपये से अधिक थी।
वर्ष 2007 में तलाड़ा में गर्गाचार्य ऋषि का देव रथ और मंदिर भी जल गया था। वर्ष 2011 में रैला पंचायत के पाशी गांव में जमदग्नि ऋषि का भव्य मंदिर साजो सामान के साथ जल गया था।
2014 में धाऊगी पंचायत के तांदी गांव में ब्रह्मा ऋषि के प्राचीन मंदिर में आग लगी।
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सैंज घाटी में बन रही बिजली परियोजनाओं के कारण देव स्थलों में छेड़छाड़ हो रही है। इससे देवी-देवता नाराज होते हैं। मंदिरों के राख होने के पीछे देवी-देवताओं ने देवस्थलों से छेड़छाड़ को ही प्रमुख माना है। वीरवार को सैंज घाटी की बनोगी पंचायत के पटहिला गांव में मकान आग की भेंट चढ़ गए। इसमें देवता पझारी की संपत्ति को भी काफी नुकसान हुआ है।
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इससे पहले भी कई मंदिर आग की भेंट चढ़ चुके हैं। ब्रह्मा देवता के कारदार भीमीराम ठाकुर, पुंडरिक के कारदार लोतम राम और लक्ष्मी नारायण देवता के कारदार जगरनाथ ने कहा कि देवताओं के पास होने वाली देवलियों में भी देवता कई बार देव स्थलों से छेड़छाड़ न करने की हिदायत दे चुके हैं। देव समाज कभी भी परियोजनाओं के पक्ष में नहीं रहा है। कारदार सुधा शर्मा और प्रबंता शर्मा ने कहा कि है कि देवता शांति चाहते हैं।
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वर्ष 2014 में शांघड क्षेत्र के अधिष्ठता देव शंगचूल ऋषि का मंदिर राख हुआ। 2015 में कोटला अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
2021 में गाड़ापारली पंचायत के मझाण गांव में आग से 25 से अधिक घर राख हो गए थे। गांव में भी देवता ढुंखरू नारायण और राई नाग का बेशकीमती सामान भी राख हो गया।
वर्ष 2005 में गाड़ापारली पंचायत के बनाउगी में देवता कशू नारायण का प्राचीन मंदिर देवता के रथ और तमाम साजो सामान के साथ राख हो गया था। नष्ट हुई संपत्ति करीब दो करोड़ रुपये से अधिक थी।
वर्ष 2007 में तलाड़ा में गर्गाचार्य ऋषि का देव रथ और मंदिर भी जल गया था। वर्ष 2011 में रैला पंचायत के पाशी गांव में जमदग्नि ऋषि का भव्य मंदिर साजो सामान के साथ जल गया था।
2014 में धाऊगी पंचायत के तांदी गांव में ब्रह्मा ऋषि के प्राचीन मंदिर में आग लगी।

सैंज घाटी की बनोगी पंचायत के पटहिला गांव में लगी आग।-संवाद