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Kullu News: पर्ची शुल्क बढ़ाने के बदले अपनी फिजूलखर्ची रोके सरकार
Fri, 06 Jun 2025 10:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 06 Jun 2025 10:24 PM IST
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शीत मरुस्थल में भी उठे विरोध के स्वर, लोग बोले- गरीब जनता पर डाला बोझ
सरकारी अस्पतालों में सरकार को इलाज नहीं करना चाहिए महंगा
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सरकार ने अस्पतालों में पर्ची (पंजीकरण) के लिए 10 रुपये शुल्क लेना शुरू कर दिया है। निशुल्क मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अल्ट्रासाउंड और ईसीजी पर शुल्क लगाने के फैसले का विरोध अब जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में भी हो रहा है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले को जनविरोधी बताया है। उनका कहना है कि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्र होने से लोगों को पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोग दशकों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा के लिए तरस गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी शुल्क वसूलना गरीब जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना है।
पूर्व सैनिक संघ के जिला अध्यक्ष सैम बौद्ध ने कहा कि पंजीकरण शुल्क के साथ मेडिकल टेस्ट के फीस बढ़ा कर गरीब जनता पर बोझ डाला गया है। पर्ची और मेडिकल टेस्ट के फीस बढ़ाने के बजाय सरकार अपनी फिजूल खर्ची पर नियंत्रण करना चाहिए। पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता रवि ठाकुर ने कहा कि हमारा इलाका छह महीने तक बर्फ से ढका रहता है। इलाज के लिए मरीजों को कुल्लू-मनाली जाना पड़ता है। ऐसे में अगर स्थानीय अस्पताल में भी हर सेवा का पैसा देना पड़े तो गरीब क्या करेंगे। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
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पूर्व मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने कहा कि यह फैसला जनता में सरकार के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से सुविधाएं सीमित हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी केलांग डॉ. रोशन लाल ने कहा कि सरकार के अधिसूचना जारी होने के बाद लाहौल-स्पीति में भी नए पंजीकरण शुल्क को लागू कर दिया है।
-- प्रदेश सरकार सिर्फ गरीबों पर बोझ डाल रही है। विधायकों के वेतन बढ़ोतरी को यह नहीं देखा की प्रदेश आर्थिक संकट से दौर से गुजर रहा है। बावजूद इसके अपने लिए तत्काल वेतन बढ़ोतरी कर दी। पर्ची का पंजीकरण शुल्क बढ़ाना सरासर गलत है।
- रमेश फारका, ग्रामीण
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पंजीकरण शुल्क और ईसीजी-अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सेवाओं पर लगाए गए शुल्क को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। दुर्गम क्षेत्रों के लिए अलग नीति बनाई जाए, ताकि लोग बिना आर्थिक दबाव स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
- सैम बौद्ध, जिला अध्यक्ष भूतपूर्व सैनिक संघ
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सरकारी अस्पतालों में सरकार को इलाज नहीं करना चाहिए महंगा
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सरकार ने अस्पतालों में पर्ची (पंजीकरण) के लिए 10 रुपये शुल्क लेना शुरू कर दिया है। निशुल्क मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अल्ट्रासाउंड और ईसीजी पर शुल्क लगाने के फैसले का विरोध अब जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में भी हो रहा है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले को जनविरोधी बताया है। उनका कहना है कि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्र होने से लोगों को पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोग दशकों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा के लिए तरस गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी शुल्क वसूलना गरीब जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना है।
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पूर्व सैनिक संघ के जिला अध्यक्ष सैम बौद्ध ने कहा कि पंजीकरण शुल्क के साथ मेडिकल टेस्ट के फीस बढ़ा कर गरीब जनता पर बोझ डाला गया है। पर्ची और मेडिकल टेस्ट के फीस बढ़ाने के बजाय सरकार अपनी फिजूल खर्ची पर नियंत्रण करना चाहिए। पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता रवि ठाकुर ने कहा कि हमारा इलाका छह महीने तक बर्फ से ढका रहता है। इलाज के लिए मरीजों को कुल्लू-मनाली जाना पड़ता है। ऐसे में अगर स्थानीय अस्पताल में भी हर सेवा का पैसा देना पड़े तो गरीब क्या करेंगे। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
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पूर्व मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने कहा कि यह फैसला जनता में सरकार के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से सुविधाएं सीमित हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी केलांग डॉ. रोशन लाल ने कहा कि सरकार के अधिसूचना जारी होने के बाद लाहौल-स्पीति में भी नए पंजीकरण शुल्क को लागू कर दिया है।
- रमेश फारका, ग्रामीण
पंजीकरण शुल्क और ईसीजी-अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सेवाओं पर लगाए गए शुल्क को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। दुर्गम क्षेत्रों के लिए अलग नीति बनाई जाए, ताकि लोग बिना आर्थिक दबाव स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
- सैम बौद्ध, जिला अध्यक्ष भूतपूर्व सैनिक संघ