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Kullu News: शराणीबेहड़ में माता रूपासना की नवनिर्मित कोठी की प्रतिष्ठा
Mon, 30 Jun 2025 10:19 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 30 Jun 2025 10:19 PM IST
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श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, देवदर्शन कर लिया आशीर्वाद
प्रतिष्ठा में देव परंपराओं का किया गया निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी की आराध्य माता रूपासना के नवनिर्मित कोठी की प्रतिष्ठा देव विधि के साथ पूरी हो गई है। सोमवार को कोठी की प्रतिष्ठा में देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा पड़ा। शराणीबेहड़ में माता रूपासना की यह कोठी करीब दो महीने में तैयार की गई।
कोठी के निर्माण के दौरान कारकूनों ने कई नियमों का पालन किया। कोठी की प्रतिष्ठा में माता रूपासना के अलावा देवता काली नाग और देवता अग्निपाल शामिल हुए। कुछ अन्य देवी-देवताओं के निशाण भी प्रतिष्ठा में शामिल हुए। देवी-देवताओं के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
प्रतिष्ठा में शामिल हुए भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसे समारोह न केवल धार्मिक भावनाओं को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि सामुदायिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक उत्साह के भी प्रतीक हैं। इस आयोजन की पवित्रता और भव्यता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। धार्मिक मूल्यों को संजोए रखने और समाज में सद्भाव व सकारात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पहले उन्होंने मंदिर प्रांगण में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। प्रतिष्ठा को लेकर शराणीबेहड़ में दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा।
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प्रतिष्ठा में देव परंपराओं का किया गया निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी की आराध्य माता रूपासना के नवनिर्मित कोठी की प्रतिष्ठा देव विधि के साथ पूरी हो गई है। सोमवार को कोठी की प्रतिष्ठा में देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा पड़ा। शराणीबेहड़ में माता रूपासना की यह कोठी करीब दो महीने में तैयार की गई।
कोठी के निर्माण के दौरान कारकूनों ने कई नियमों का पालन किया। कोठी की प्रतिष्ठा में माता रूपासना के अलावा देवता काली नाग और देवता अग्निपाल शामिल हुए। कुछ अन्य देवी-देवताओं के निशाण भी प्रतिष्ठा में शामिल हुए। देवी-देवताओं के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
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प्रतिष्ठा में शामिल हुए भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसे समारोह न केवल धार्मिक भावनाओं को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि सामुदायिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक उत्साह के भी प्रतीक हैं। इस आयोजन की पवित्रता और भव्यता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। धार्मिक मूल्यों को संजोए रखने और समाज में सद्भाव व सकारात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पहले उन्होंने मंदिर प्रांगण में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। प्रतिष्ठा को लेकर शराणीबेहड़ में दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा।
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