लाहौल में बर्फबारी के लिए अठारह नाग की पूजा
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एक तरफ जहां हिमाचल के कई हिस्सों में भारी बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं रोहतांग के इस पर लाहौल घाटी बर्फबारी के लिए तरस गया है। सर्दियों में बर्फ की मोटी चादर से ढक जाने वाली घाटी में इस बार बेहद कम बर्फबारी हुई है। जिला में पिछले साल की तुलना में इस बार 60 फीसदी कम बर्फबारी हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि लोग बर्फबारी के लिए देवताओं की चौखट पर पहुंचे हैं। घाटी में इस सीजन अभी तक महज दो से ढाई फुट तक बर्फ गिरी है। बुधवार को गाहर वैली के लोगों ने बर्फबारी के लिए अठारह नाग की पूजा अर्चना की। स्थानीय निवासी टशी, पलजोर, दोरजे, कुंदन और प्रेमलाल का कहना है कि इस बार घाटी में कम बर्फबारी होने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
बर्फबारी नहीं होने से कृषि सीजन में कई इलाकों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लिहाजा बुधवार को लोगों ने बिलिंग स्थित देवता अठारह नाग के मंदिर में बर्फबारी के लिए पूजा अर्चना की है। कुंदन ने बताया कि सर्दियों में जहां समूचा लाहौल घाटी बर्फ से लकदक होती थी और लोगों को एक घर से दूसरे घर तक जाना मुश्किल होता था। लेकिन इस बार अभी तक घाटी के भीतर सड़कों में वाहन दौड़ रहे हैं। पहाड़ों की चोटियां को अभी तक बर्फ की चादर ढक नहीं पाई है। ऐसे में किसानों की चिंता लाजिमी है। वहीं जिला बागबानी अधिकारी डॉ. सोनम ने कहा कि इस बार बर्फबारी कम होने से घाटी में सीजन के दौरान सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हो सकती है।