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सड़क होती तो बच सकते थे कई मकान

Wed, 27 Oct 2021 09:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 09:03 PM IST
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Had there been a road, many houses could have been saved.
कुल्लू। जिला कुल्लू में आग की घटनाएं नहीं थम रही हैं। दो दशक से जिले में गांव दर गांव राख होते जा रहे हैं। आग से सबसे अधिक नुकसान मूलभूत सुविधाओं के अभाव से हो रहा है। यह समस्या ऐतिहासिक गांव मलाणा में लगी आग को बुझाते समय भी सामने आई है।
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दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र के नाम से मशहूर मलाणा गांव अभी सड़क सुविधा से दूर है। आजादी के 74 साल बाद भी यहां सड़क नहीं पहुंच सकी है। हालांकि कुल्लू से मलाणा के लिए निगम की बस चलती है, लेकिन वह गांव से करीब तीन किलोमीटर पीछे तक ही जाती है। गांव तक सड़क निकालने का काम चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव तक सड़क होती तो नुकसान को कम किया जा सकता है और कई घरों को जलने से बचाया जा सकता था। इसके अलावा गांव में पानी की भी भारी कमी महसूस की गई। पानी की कमी से अग्निकांड पर काबू नहीं पाया जा सका। हालांकि गांव में भड़की आग को बुझाने के लिए मलाणा गांव के साथ आसपास के ग्रामीण भी पहुंचे। इसके अलावा कुल्लू से अग्निशमन विभाग की भी एक टीम भी मौके पर पहुंची। लेकिन सड़क के अभाव से उन्हें मौके पर पहुंचने के लिए आधा घंटे पैदल ही सफर करना पड़ा है। रात करीब एक बजे भड़की आग को काबू पाने में लोगों को सुबह तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय मलाणा पंचायत के उपप्रधान राम जी ने कहा कि पानी की कमी भी आग बुझाने में बड़ी बाधा बनी है। उपप्रधान ने कहा कि सड़क व पानी की अगर गांव में सुविधा होती को इतने मकान नहीं जलते। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने आग बुझाने की कड़ी मशक्कत की, लेकिन सब कुछ राख के ढेर में तब्दील हो गया है। प्रभावित गांव के लोग सर्दी भरे दिनों को काटने को लेकर चिंता में हैं। उन्होंने कहा कि अब सभी की नजर सरकार व जिला प्रशासन पर टिकी है। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि आग से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की जाएगी।
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एक मकान को न बचाते तो होता बड़ा नुकसान
कुल्लू। मलाणा में आग की लपटों में 17 घर आ गए। इसके साथ ही ग्रामीणों, दमकल कर्मचारियों और अन्य लोगों ने मिलकर एक मकान को जलने से बचाया। अगर इस मकान में भी आग भड़क जाती को इसके साथ छह और मकान भी आग की चपेट में आ जाते। इससे गांव में नुकसान और भी बड़ा होता। दमकल और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर करोड़ों की संपत्ति को जलने से बचाया है।
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