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किसानों-बागवानों को जमीन से बेदखल कर रही सरकार : शाद
Wed, 05 Feb 2025 08:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 05 Feb 2025 08:50 AM IST
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लारजी में संयुक्त अधिवेशन में उपस्थित पदाधिकारी और किसान-बागवान। -संवाद
न्यूली (कुल्लू)। हिमाचल प्रदेश किसान सभा के पूर्व राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार जनता को अपनी जमीन बेदखल कर रही है। ये मुद्दा लोगों के जीवन यापन से जुड़ा है और मौलिक अधिकार के हनन का है।
वह मंगलवार को लारजी में हिमाचल प्रदेश किसान सभा और सेब उत्पादक संघ लोकल कमेटी बंजार और बालीचौकी के संयुक्त अधिवेशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार सड़कों, बांधों और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर गरीबों को उजाड़ रही है, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को हजारों बीघा जमीन खनन के लिए दी जा रही है।
अधिवेशन में भूमि बेदखली मुख्य मुद्दा बना रहा। किसानों और बागवानों ने सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि अधिकांश बेदखली गरीब व दलित परिवारों की हो रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया जा रहा है।
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पूर्व राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद ने मांग की कि सरकार पांच बीघा तक जमीन जनता को उपलब्ध करवाए और भूमिहीनों को घर बनाने के लिए कम से कम दो बिस्वा भूमि दी जाए। अधिवेशन के दौरान क अपनी मुख्य मांगों को लेकर 11 फरवरी को सरकार को मांग पत्र सौंपने का निर्णय लिया है। इस मौके पर नारायण चौहान, महेंद्र राणा और महेंद्र सिंह राणा सहित कई अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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वह मंगलवार को लारजी में हिमाचल प्रदेश किसान सभा और सेब उत्पादक संघ लोकल कमेटी बंजार और बालीचौकी के संयुक्त अधिवेशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार सड़कों, बांधों और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर गरीबों को उजाड़ रही है, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को हजारों बीघा जमीन खनन के लिए दी जा रही है।
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अधिवेशन में भूमि बेदखली मुख्य मुद्दा बना रहा। किसानों और बागवानों ने सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि अधिकांश बेदखली गरीब व दलित परिवारों की हो रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया जा रहा है।
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पूर्व राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद ने मांग की कि सरकार पांच बीघा तक जमीन जनता को उपलब्ध करवाए और भूमिहीनों को घर बनाने के लिए कम से कम दो बिस्वा भूमि दी जाए। अधिवेशन के दौरान क अपनी मुख्य मांगों को लेकर 11 फरवरी को सरकार को मांग पत्र सौंपने का निर्णय लिया है। इस मौके पर नारायण चौहान, महेंद्र राणा और महेंद्र सिंह राणा सहित कई अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।