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Kullu News: लंका दहन के बाद देवालय लौटे देवी-देवता
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कुल्लू। देव महाकुंभ में लंका दहन के बाद अब देवताओं ने देवलुओं के साथ देवालय की ओर प्रस्थान कर दिया है। देवी-देवताओं ने सात दिनों तक ढालपुर मैदान में रहकर दशहरा उत्सव की परंपरा का निर्वहन किया।
शनिवार सुबह ढालपुर में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का सिलसिला आरंभ हुआ। पूजा के बाद सैंज, बंजार, आनी, निरमंड के कुछ देवताओं ने प्रस्थान किया। सुबह करीब 9:00 बजे अन्य देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी टेंट समेटने का काम शुरू कर दिया। देवलू दोपहर तक सामान की पैकिंग में लगे रहे।
ऊझी घाटी के कई देवता सुबह 10:00 बजे के बाद अपने देवालयों की ओर रवाना हुए। लंका दहन में शामिल होने वाले देवताओं की संख्या 60 रहती है। अधिकतर देवता लंका दहन के दिन अपने देवालयों की ओर लौट जाते हैं। देवालय लौटने से पहले देवी-देवताओं का भव्य देवमिलन हुआ। कन्या रूपी माता भागासिद्ध ने देवता बिजली महादेव, माता दशमी वारदा से भव्य देवमिलन किया।
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जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने कहा कि जिस तरह से देवी-देवताओं का दशहरा उत्सव में आने का शेड्यूल बना था, उसी तरह वापसी का भी शेड्यूल बना है। कई देवता भक्त के घर निमंत्रण पर जाएंगे, तो कुछ देवता सीधे देवालय पहुंचेंगे। दूरदराज क्षेत्र आनी और निरमंड के देवता चार से पांच दिन की यात्रा के बाद अपने देवालय पहुंचेंगे। संवाद
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शनिवार सुबह ढालपुर में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का सिलसिला आरंभ हुआ। पूजा के बाद सैंज, बंजार, आनी, निरमंड के कुछ देवताओं ने प्रस्थान किया। सुबह करीब 9:00 बजे अन्य देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी टेंट समेटने का काम शुरू कर दिया। देवलू दोपहर तक सामान की पैकिंग में लगे रहे।
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ऊझी घाटी के कई देवता सुबह 10:00 बजे के बाद अपने देवालयों की ओर रवाना हुए। लंका दहन में शामिल होने वाले देवताओं की संख्या 60 रहती है। अधिकतर देवता लंका दहन के दिन अपने देवालयों की ओर लौट जाते हैं। देवालय लौटने से पहले देवी-देवताओं का भव्य देवमिलन हुआ। कन्या रूपी माता भागासिद्ध ने देवता बिजली महादेव, माता दशमी वारदा से भव्य देवमिलन किया।
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जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने कहा कि जिस तरह से देवी-देवताओं का दशहरा उत्सव में आने का शेड्यूल बना था, उसी तरह वापसी का भी शेड्यूल बना है। कई देवता भक्त के घर निमंत्रण पर जाएंगे, तो कुछ देवता सीधे देवालय पहुंचेंगे। दूरदराज क्षेत्र आनी और निरमंड के देवता चार से पांच दिन की यात्रा के बाद अपने देवालय पहुंचेंगे। संवाद