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गैस सिलिंडर की समस्या गंभीर : सैम बौध
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सरकार और जनप्रतिनिधि के दावे हवा-हवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जिले में गैस सिलिंडर की किल्लत अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि अभी भी गैस सिलिंडर की कमी नहीं होने का दावा कर रहे हैं। यह आरोप भाजपा के जिला प्रवक्ता सैम बौध ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार जितने मर्जी दावे कर लें लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम लोगों को 45 दिन में एक सिलिंडर दिया जा रहा है, जो दैनिक जरूरतों के लिए अपर्याप्त है। वहीं, ढाबा, रेस्टोरेंट और होटल संचालकों को कमर्शियल गैस के लिए अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि घाटी में पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है। अधिकांश व्यवसायिक गैस की कमी के कारण समय पर अपना काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में गैस की इतनी कमी है, तो 400 कमर्शियल सिलिंडर जिले से बाहर भेजना कितना उचित था? उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को चाहिए कि जमीनी स्थिति को समझे और तुरंत ठोस कदम उठाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जिले में गैस सिलिंडर की किल्लत अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि अभी भी गैस सिलिंडर की कमी नहीं होने का दावा कर रहे हैं। यह आरोप भाजपा के जिला प्रवक्ता सैम बौध ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार जितने मर्जी दावे कर लें लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम लोगों को 45 दिन में एक सिलिंडर दिया जा रहा है, जो दैनिक जरूरतों के लिए अपर्याप्त है। वहीं, ढाबा, रेस्टोरेंट और होटल संचालकों को कमर्शियल गैस के लिए अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि घाटी में पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है। अधिकांश व्यवसायिक गैस की कमी के कारण समय पर अपना काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में गैस की इतनी कमी है, तो 400 कमर्शियल सिलिंडर जिले से बाहर भेजना कितना उचित था? उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को चाहिए कि जमीनी स्थिति को समझे और तुरंत ठोस कदम उठाए।