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Kullu News: बाढ़ ने घर तोड़ा और व्यवस्था ने उम्मीद, टेंट में ठिठुर रही जिंदगी

Thu, 11 Dec 2025 10:53 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 11 Dec 2025 10:53 PM IST
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Floods destroyed homes and the system destroyed hope, leaving life shivering in tents.
सैंज के दुर्गम शुगाड़ गांव में आपदा के बाद अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। चार माह भी पांच प
उम्मीद, टेंट में ठिठुर रही जिंदगी
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आशियाने खोने के बाद टेंट में सर्द रातें काट रहे शुगाड़ के पांच परिवार
मवेशियों के लिए भी लगाए टेंट, बोले- सरकार से नहीं मिली अभी मदद

महेंद्र पालसरा
न्यूली/सैंज (कुल्लू)। बाढ़ का पानी कब का उतर चुका है, मगर उसके छोड़े जख्म अभी भी शुगाड़ की ठंडी हवा में ताजा हैं। पिन पार्वती नदी के उफान में आशियाने खो चुके पांच परिवार आज भी टेंटों में रातें काट रहे हैं।
माइनस तापमान से लड़ना भी रोज की जंग बन गया है। सड़क, रोशनी और सरकारी सहायता से दूर यह दुर्गम गांव अब बर्फबारी से पहले एक और मुश्किल भरी ऋतु के सामने खड़ा है। अभी तक प्रभावित परिवारों को सरकार से सहायता नहीं मिली है।
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अगस्त में पिन पार्वती नदी में आई बाढ़ में शुगाड़ से लेकर शाक्टी, मरोड़ और सैंज घाटी में काफी नुकसान हुआ था। शुगाड़ में पांच परिवारों के आशियाने बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इसके बाद प्रशासन ने नुकसान का आकलन किया। फौरी राहत के सिवाय अभी तक परिवार को सहायता नहीं मिली है।
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शुगाड़, शाक्टी और मरोड़ कुल्लू जिले के सबसे दुर्गम क्षेत्र हैं। प्रभावित प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए धनराशि की मांग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार से मिलने वाली धनराशि का भी इंतजार है। प्रभावित पांच परिवारों ने मवेशियों के लिए टेंट लगाए हैं।
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न बिजली न सड़क, सोलर लाइटों से रोशन होते हैं गांव
मरोड़ गांव तक पहुंचने के लिए पहले रोपा से शाक्टी तक 18 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है। इसके बाद करीब एक घंटे का सफर कर शुगाड़ पहुंचते हैं। सरकार आपदा प्रभावितों की हरसंभव सहायता करने की बातें तो कर रही है लेकिन धरातल पर अभी तक प्रभावितों को मदद नहीं मिल पाई है। शाक्टी, मरोड़ और शुगाड़ गांव सड़क और बिजली की सुविधा से भी वंचित हैं। इन गांवों तक बिजली लाइन नहीं पहुंची है। गांव में सोलर लाइटों से ही उजाला होता है।
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मुश्किल से आशियाना बनाया था। दुर्गम क्षेत्र में अभी तक सड़क की सुविधा नहीं है। आपदा के बाद समय पर सहायता न मिल पाना बेहद दुखद है। सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए धनराशि स्वीकृत करे। - भाग चंद, निवासी शुगाड़
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सर्द रातों में परिवार के सदस्य टेंट में रातें बिता रहे हैं। सरकार से अभी तक मदद नहीं मिली है। मकान बनाने में समय लगेगा। सर्दियों में बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। मजबूरी में टेंट में ही रातें गुजारनी पड़ेंगी। - गोविंद राम, निवासी शुगाड़

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बंजार विधानसभा क्षेत्र में आपदा में काफी अधिक नुकसान हुआ है। आपदा प्रभावितों के पास जाकर स्वयं उनकी सहायता करने की कोशिश की है। प्रदेश सरकार आपदा प्रभावितों की मदद करे। - सुरेंद्र शौरी, विधायक, बंजार
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