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बिना सुरक्षा उपकरणों के रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे दमकल कर्मचारी
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ब्यास नदी में पानी में अठखेलियां करते पर्यटक। -संवाद
- फोटो : Kullu
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मनाली (कुल्लू)। ब्यास की लहरों में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी जान दांव पर लगा रहे हैं। सुरक्षा उपकरणों के बिना ही कर्मचारी रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं।
अब तक ब्यास की लहरों में फंसे कई लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। हैरत यह है कि नदी के बीच जाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को लाइफ जैकेट तक का प्रावधान नहीं किया है। मनाली में ब्यास नदी में पर्यटकों के फंसने की घटनाएं अधिक होने से इसकी आवश्यकता शिद्दत से महसूस की जा रही है।
पर्यटन नगरी मनाली आने वाले पर्यटकों की संख्या में हर वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रशासन की ओर से चेतावनी भरे साइन बोर्ड लगाने के बावजूद पर्यटक ब्यास के तट पर फोटो लेने जाते हैं। इससे कई बार उनकी जिंदगी दांव पर लग जाती है। इसी महीने अग्निशमन विभाग ने इस तरह के तीन लोगों को रेस्क्यू किया।
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एक मामला वोल्वो बस स्टैंड के समीप का है। यहां मुंह-हाथ धोने के लिए नदी तट पर गया युवक नदी में बह गया। इसे अग्निशमन विभाग की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। ऐस ही मामला फोरलेन पुल के पास भी सामने आया। कुछ दिन पहले यहां एक युवक सेल्फी लेने के लिए नदी तट पर गया। पांव फिसलकर वह गिर गया और नदी में बीचों-बीच फंस गया। उसे भी अग्निशमन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया। इसी स्थान पर नेपाली मूल की एक युवती को भी टीम ने रेस्क्यू किया।
हैरत यह है कि अग्निशमन विभाग की टीम तमाम रेस्क्यू ऑपरेशन को महज रस्सों और सीढ़ी के सहारे ही अंजाम दे रही है। अग्निशमन विभाग की टीम के पास ने तो लाइफ जैकेट है और न ही कैराविनर। गौरतलब है कि इस तरह की आपदा के लिए हर जिले में जिला आपदा प्राधिकरण का गठन किया गया है। ऐसे मामलों में अकसर अग्निशमन विभाग की टीम को ही सूचना दी जाती है। अग्निशमन विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन करते हैं। कर्मचारी बिना लाइफ जैकेट, कैराविनर और अन्य सुरक्षा उपकरणों के नदी में पर्यटकों को जान पर खेल कर बचा रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के कमांडेंट एनएस नेगी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। हालांकि आपदा प्रबंधन के पास तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। चूंकि मनाली में इस तरह के रेस्क्यू में अधिकतर बार अग्निशमन विभाग के कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं। लिहाजा जल्द ही दमकल कर्मचारियों को लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएंगे।
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अब तक ब्यास की लहरों में फंसे कई लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। हैरत यह है कि नदी के बीच जाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को लाइफ जैकेट तक का प्रावधान नहीं किया है। मनाली में ब्यास नदी में पर्यटकों के फंसने की घटनाएं अधिक होने से इसकी आवश्यकता शिद्दत से महसूस की जा रही है।
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पर्यटन नगरी मनाली आने वाले पर्यटकों की संख्या में हर वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रशासन की ओर से चेतावनी भरे साइन बोर्ड लगाने के बावजूद पर्यटक ब्यास के तट पर फोटो लेने जाते हैं। इससे कई बार उनकी जिंदगी दांव पर लग जाती है। इसी महीने अग्निशमन विभाग ने इस तरह के तीन लोगों को रेस्क्यू किया।
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एक मामला वोल्वो बस स्टैंड के समीप का है। यहां मुंह-हाथ धोने के लिए नदी तट पर गया युवक नदी में बह गया। इसे अग्निशमन विभाग की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। ऐस ही मामला फोरलेन पुल के पास भी सामने आया। कुछ दिन पहले यहां एक युवक सेल्फी लेने के लिए नदी तट पर गया। पांव फिसलकर वह गिर गया और नदी में बीचों-बीच फंस गया। उसे भी अग्निशमन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया। इसी स्थान पर नेपाली मूल की एक युवती को भी टीम ने रेस्क्यू किया।
हैरत यह है कि अग्निशमन विभाग की टीम तमाम रेस्क्यू ऑपरेशन को महज रस्सों और सीढ़ी के सहारे ही अंजाम दे रही है। अग्निशमन विभाग की टीम के पास ने तो लाइफ जैकेट है और न ही कैराविनर। गौरतलब है कि इस तरह की आपदा के लिए हर जिले में जिला आपदा प्राधिकरण का गठन किया गया है। ऐसे मामलों में अकसर अग्निशमन विभाग की टीम को ही सूचना दी जाती है। अग्निशमन विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन करते हैं। कर्मचारी बिना लाइफ जैकेट, कैराविनर और अन्य सुरक्षा उपकरणों के नदी में पर्यटकों को जान पर खेल कर बचा रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के कमांडेंट एनएस नेगी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। हालांकि आपदा प्रबंधन के पास तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। चूंकि मनाली में इस तरह के रेस्क्यू में अधिकतर बार अग्निशमन विभाग के कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं। लिहाजा जल्द ही दमकल कर्मचारियों को लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएंगे।