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Kullu News: सैंज-न्यूली-शैंशर सड़क पर एफडीआर का ट्रायल
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न्यूली (कुल्लू)। जिला कुल्लू की सैंज घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़क पर लोक निर्माण विभाग ने फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) का ट्रायल किया। इसके लिए मंगलवार को दो घंटे के लिए दोपहर 12:00 से 02:00 बजे तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही को रोका गया। विभाग ने सड़क पर एफडीआर तकनीक में उपयोग होने वाले सीमेंट और केमिकल के घोल को करीब 100 मीटर में बिछाया। हालांकि इस घोल के सैंपल भी लिए गए हैं। अगर सैंपल जांच में सही पाए जाते हैं, तो विभाग इसी तकनीक से सड़कों की टारिंग करेगा।
सैंज-न्यूली-शैंशर सड़क का विस्तार किया जा रहा है। सड़क को तंग जगहों पर चौड़ा किया जा रहा है। इसके अलावा ब्लैक स्पॉट हटाने, कलवर्ट, डंगे और निकास नालियां बनाने का काम भी हो रहा है। सड़क को चकाचक करने के लिए टारिंग भी होनी है। इस सड़क पर विभाग की नई तकनीक एफडीआर के तहत टारिंग करने की योजना है, जिसका मंगलवार को ट्रायल विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र गुप्ता और अधिशासी अभियंता चमन की निगरानी में किया गया।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाता है। यह एक रिसाइकलिंग पद्धति है, जिसके जरिए कम संसाधनों में टिकाऊ सड़कें बनाई जाती हैं। इस तकनीक में खराब हो चुकी पक्की सड़क को उखाड़कर उससे निकलने वाले मटीरियल में केमिकल मिलाकर नया मटीरियल तैयार किया जाता है और फिर उसे सड़क पर डाला जाता है। कहा कि इस तकनीक से बनने वाली सड़कों की मरम्मत की ज्यादा जरूरत नहीं होती और सड़क बनाने में बनाने में खर्च भी कम आता है। संवाद
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सैंज-न्यूली-शैंशर सड़क का विस्तार किया जा रहा है। सड़क को तंग जगहों पर चौड़ा किया जा रहा है। इसके अलावा ब्लैक स्पॉट हटाने, कलवर्ट, डंगे और निकास नालियां बनाने का काम भी हो रहा है। सड़क को चकाचक करने के लिए टारिंग भी होनी है। इस सड़क पर विभाग की नई तकनीक एफडीआर के तहत टारिंग करने की योजना है, जिसका मंगलवार को ट्रायल विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र गुप्ता और अधिशासी अभियंता चमन की निगरानी में किया गया।
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इस संबंध में अधीक्षण अभियंता जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाता है। यह एक रिसाइकलिंग पद्धति है, जिसके जरिए कम संसाधनों में टिकाऊ सड़कें बनाई जाती हैं। इस तकनीक में खराब हो चुकी पक्की सड़क को उखाड़कर उससे निकलने वाले मटीरियल में केमिकल मिलाकर नया मटीरियल तैयार किया जाता है और फिर उसे सड़क पर डाला जाता है। कहा कि इस तकनीक से बनने वाली सड़कों की मरम्मत की ज्यादा जरूरत नहीं होती और सड़क बनाने में बनाने में खर्च भी कम आता है। संवाद
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