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Kullu News: स्पीति में किसानों ने सीखी जैविक खेती की तकनीक
Thu, 05 Jun 2025 10:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 05 Jun 2025 10:45 PM IST
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पहली बार शिविर लगाकर कीट नियंत्रण पर जागरूक किए किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। स्पीति घाटी में पहली बार किसानों के लिए जैविक कीट नियंत्रण पर विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए।
डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के कीट विज्ञान विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ताबो के सहयोग से यह शिविर लालुंग, धनखड़, कुंगरी और टिंगटी गांवों में आयोजित किए गए। शिविरों में 60 से अधिक किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीक सिखाई गई और कीट नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया।
कीट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में जैव नियंत्रण की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शुष्क समशीतोष्ण क्षेत्रों में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है। हमें जैविक विकल्प अपनाने होंगे। उन्हाेंने सेब और अन्य फलों की फसलों में वूली एप्पल एफिड और रूट बोरर जैसे प्रमुख कीटों के प्रबंधन के लिए एफेलिनस मैली, सिरफिड्स और माइक्रोबियल एजेंट्स के प्रयोग की जानकारी दी। शिविर में केवीके ताबो की फल वैज्ञानिक डॉ. अंकिता धीमान ने सेब की आधुनिक बागवानी तकनीकों जैसे क्लोनल रूट स्टॉक, प्रशिक्षण, छंटाई और पोषक तत्व प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। डॉ. विश्व गौरव सिंह चंदेल ने आक्रामक कीटों की पहचान और प्रबंधन के उपाय समझाए। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। स्पीति घाटी में पहली बार किसानों के लिए जैविक कीट नियंत्रण पर विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए।
डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के कीट विज्ञान विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ताबो के सहयोग से यह शिविर लालुंग, धनखड़, कुंगरी और टिंगटी गांवों में आयोजित किए गए। शिविरों में 60 से अधिक किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीक सिखाई गई और कीट नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया।
कीट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में जैव नियंत्रण की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शुष्क समशीतोष्ण क्षेत्रों में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है। हमें जैविक विकल्प अपनाने होंगे। उन्हाेंने सेब और अन्य फलों की फसलों में वूली एप्पल एफिड और रूट बोरर जैसे प्रमुख कीटों के प्रबंधन के लिए एफेलिनस मैली, सिरफिड्स और माइक्रोबियल एजेंट्स के प्रयोग की जानकारी दी। शिविर में केवीके ताबो की फल वैज्ञानिक डॉ. अंकिता धीमान ने सेब की आधुनिक बागवानी तकनीकों जैसे क्लोनल रूट स्टॉक, प्रशिक्षण, छंटाई और पोषक तत्व प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। डॉ. विश्व गौरव सिंह चंदेल ने आक्रामक कीटों की पहचान और प्रबंधन के उपाय समझाए। संवाद
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