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Kullu News: विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी प्रदर्शनी
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लालचंद प्रार्थी कला केंद्र में लगी प्रदर्शनी को निहारते हुए विद्यार्थी . संवाद
- फोटो : 1
कुल्लू। विद्यार्थियों के लिए इन दिनों राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पुस्तक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों को स्कूल की किताबों के अलावा दूसरी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के लिए भी प्रेरित कर रही है। इन दिनों अलग-अलग स्कूलों से विद्यार्थी प्रदर्शनी देखने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां उन्हें कई प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकें पसंद आ रही हैं। किसी को अल्बर्ट आइंस्टीन तो किसी को मुंशी प्रेम चंद की पुस्तकें पसंद आ रही है। इसके साथ ही उनका धार्मिक पुस्तकों की ओर भी रुझान देखा गया है। बुधवार को भी काफी संख्या में स्कूली विद्यार्थी पुस्तक प्रदर्शनी में पहुंचे और यहां किताबों को करीब से निहारा और जो पुस्तकें पसंद आईं, उनकी खरीदारी भी की। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक शिरढ़ के विद्यार्थियों ने भी पुस्तक प्रदर्शनी में पहुंचकर प्रदर्शनी निहारी और खरीदारी की।
पुस्तक प्रदर्शनी में काफी अच्छी पुस्तकें हैं और मुझे अल्बर्ट आइंस्टीन की पुस्तक पसंद आई। इसमें उन्होंने अपने आविष्कार के बारे में जानकारी दी है। इनकी कीमत भी सामान्य है। किताबों को बोझ समझकर नहीं पढ़ना चाहिए, बल्कि इसकी आदत बनानी चाहिए। इन्हें पढ़ने से हमें तार्किक जवाब कैसे देना है, इसका पता चलता है।
-- अरब ब्यास, जमा दो छात्र
लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में लगी प्रदर्शनी में काफी अच्छी किताबें मौजूद हैं। इनमें कई लेखकों की आत्मकथा शामिल है जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। मुझे खासकर मुंशी प्रेम चंद की लिखी पुस्तकें पसंद आई हैं जो समाज में लोगों की दुर्दशा को दर्शाने वाली हैं। वैसे भी आजकल मोबाइल की दुनिया में व्यस्त होने के बजाय किताबें पढ़नी चाहिए। किताबें हमारी सोचने और समझने की शक्ति को बढ़ाती हैं और बौद्धिक विकास होता है।
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-- निशा, जमा दो, छात्रा
हमें पुस्तक प्रदर्शनी देखने का मौका मिला है और यहां काफी ज्यादा पुस्तकें रखी गई है। इनमें से मुझे दा लाइफ ऑफ दा बुद्धा फार यंग पीपल पसंद आई, जिसे खरीदने वाली हूं। स्कूल की ओर से भी पुस्तकालय के लिए किताबें खरीदी जा रही हैं जो निश्चित रूप से बच्च़ों को पढ़ने के लिए फायदेमंद होगी।
-- मन्नत ठाकुर, जमा दो छात्रा
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पुस्तक प्रदर्शनी में काफी अच्छी पुस्तकें हैं और मुझे अल्बर्ट आइंस्टीन की पुस्तक पसंद आई। इसमें उन्होंने अपने आविष्कार के बारे में जानकारी दी है। इनकी कीमत भी सामान्य है। किताबों को बोझ समझकर नहीं पढ़ना चाहिए, बल्कि इसकी आदत बनानी चाहिए। इन्हें पढ़ने से हमें तार्किक जवाब कैसे देना है, इसका पता चलता है।
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लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में लगी प्रदर्शनी में काफी अच्छी किताबें मौजूद हैं। इनमें कई लेखकों की आत्मकथा शामिल है जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। मुझे खासकर मुंशी प्रेम चंद की लिखी पुस्तकें पसंद आई हैं जो समाज में लोगों की दुर्दशा को दर्शाने वाली हैं। वैसे भी आजकल मोबाइल की दुनिया में व्यस्त होने के बजाय किताबें पढ़नी चाहिए। किताबें हमारी सोचने और समझने की शक्ति को बढ़ाती हैं और बौद्धिक विकास होता है।
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हमें पुस्तक प्रदर्शनी देखने का मौका मिला है और यहां काफी ज्यादा पुस्तकें रखी गई है। इनमें से मुझे दा लाइफ ऑफ दा बुद्धा फार यंग पीपल पसंद आई, जिसे खरीदने वाली हूं। स्कूल की ओर से भी पुस्तकालय के लिए किताबें खरीदी जा रही हैं जो निश्चित रूप से बच्च़ों को पढ़ने के लिए फायदेमंद होगी।