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Kullu News: डिजिटल युग में भी पहाड़ी पर चढ़कर ढूंढना पड़ता है सिगनल
Wed, 29 Jan 2025 09:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 29 Jan 2025 09:59 PM IST
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गाड़ापारली पंचायत के दुर्गम गांवों में सिग्नल की तलाश में करना पड़ता है मीलों का सफर
शाेपीस बने मोबाइल, प्रमाण पत्र बनवाने, आवेदन करने के लिए लगती है सैंज की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सरकार और प्रशासन डिजिटल भारत का हवाला देते हैं। डिजिटल तकनीक से कामकाज करने को बढ़ावा देने की बात की जाती है, लेकिन जिला कुल्लू की दुर्गम ग्राम पंचायत गाड़ापारली के हालात डिजिटल भारत के हवा-हवाई दावों की पोल खोल रहे हैं।
पंचायत के दुर्गम गांवों में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है। बिना मोबाइल नेटवर्क के बिना कैसे डिजिटल तकनीक से काम होंगे। यहां तो ग्रामीणों को अपनों से बात करने और उनका हाल-चाल जानने के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलकर या ऊंची पहाड़ी पर चढ़कर मोबाइल नेटवर्क खोजना पड़ता है।
ग्राम पंचायत गाड़ापारली में न तो सड़क की सुविधा है और न ही बिजली व्यवस्था। नेटवर्क न होने से मोबाइल भी शोपीस बने हुए हैं। निहारनी, मैल, शुगाड़, मझाण, शाक्टी, मरौड़ और कुटला गांव के ग्रामीणों को आवश्यक कामकाज निपटाने के लिए भी कई किलोमीटर स्थित सैंज पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों को लोकमित्र, बैकिंग व ऑनलाइन प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने भी सैंज की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय के साथ ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीण सोमदेव, आलम, निमत राम, भागीराम ने कहा कि भारत संचार निगम लिमिटेड ने सर्वे तो किया, लेकिन उसके बाद कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई। इस संबंध में निगम के एजीएम सत्यनंद ने कहा कि सर्दी के दिनों में बर्फबारी के बीच कार्य कर पाना संभव नहीं है। निगम जल्द ही पंचायत में सर्वे के अनुसार मोबाइल नेटवर्क टॉवर स्थापित करेगा।
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ग्राम पंचायत गाड़ापारली के दुर्गम गांवों में नेटवर्क की समस्या है। ग्रामीणों को एक छोटा सा प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने भी सैंज पहुंचना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाने पड़ रहे हैं। - चेतराम, मैल
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पंचायत के करीब सात गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। नेटवर्क न होने की वजह से अपनों से बात नहीं हो पाती। उनका हाल जानने के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। -भागचंद, शाक्टी
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पंचायत के दुर्गम गांवों में नेटवर्क का न होना समस्या बना हुआ है। नेटवर्क न होना बच्चों की पढ़ाई दिक्कत दे रहा है। बच्चे ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई नहीं कर पा रहे है। - लिखित राम, मैल
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ग्राम पंचायत गाड़ापारली के दुर्गम गांवों में नेटवर्क की समस्या हल नहीं हो पाई है। ग्रामीण सरकार, प्रशासन और निगम से मोबाइल टॉवर स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सालों से ग्रामीणों की मांग दरकिनार हो रही है। -दीपू, मैल
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शाेपीस बने मोबाइल, प्रमाण पत्र बनवाने, आवेदन करने के लिए लगती है सैंज की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सरकार और प्रशासन डिजिटल भारत का हवाला देते हैं। डिजिटल तकनीक से कामकाज करने को बढ़ावा देने की बात की जाती है, लेकिन जिला कुल्लू की दुर्गम ग्राम पंचायत गाड़ापारली के हालात डिजिटल भारत के हवा-हवाई दावों की पोल खोल रहे हैं।
पंचायत के दुर्गम गांवों में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है। बिना मोबाइल नेटवर्क के बिना कैसे डिजिटल तकनीक से काम होंगे। यहां तो ग्रामीणों को अपनों से बात करने और उनका हाल-चाल जानने के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलकर या ऊंची पहाड़ी पर चढ़कर मोबाइल नेटवर्क खोजना पड़ता है।
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ग्राम पंचायत गाड़ापारली में न तो सड़क की सुविधा है और न ही बिजली व्यवस्था। नेटवर्क न होने से मोबाइल भी शोपीस बने हुए हैं। निहारनी, मैल, शुगाड़, मझाण, शाक्टी, मरौड़ और कुटला गांव के ग्रामीणों को आवश्यक कामकाज निपटाने के लिए भी कई किलोमीटर स्थित सैंज पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों को लोकमित्र, बैकिंग व ऑनलाइन प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने भी सैंज की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय के साथ ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीण सोमदेव, आलम, निमत राम, भागीराम ने कहा कि भारत संचार निगम लिमिटेड ने सर्वे तो किया, लेकिन उसके बाद कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई। इस संबंध में निगम के एजीएम सत्यनंद ने कहा कि सर्दी के दिनों में बर्फबारी के बीच कार्य कर पाना संभव नहीं है। निगम जल्द ही पंचायत में सर्वे के अनुसार मोबाइल नेटवर्क टॉवर स्थापित करेगा।
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ग्राम पंचायत गाड़ापारली के दुर्गम गांवों में नेटवर्क की समस्या है। ग्रामीणों को एक छोटा सा प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने भी सैंज पहुंचना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाने पड़ रहे हैं। - चेतराम, मैल
पंचायत के करीब सात गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। नेटवर्क न होने की वजह से अपनों से बात नहीं हो पाती। उनका हाल जानने के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। -भागचंद, शाक्टी
पंचायत के दुर्गम गांवों में नेटवर्क का न होना समस्या बना हुआ है। नेटवर्क न होना बच्चों की पढ़ाई दिक्कत दे रहा है। बच्चे ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई नहीं कर पा रहे है। - लिखित राम, मैल
ग्राम पंचायत गाड़ापारली के दुर्गम गांवों में नेटवर्क की समस्या हल नहीं हो पाई है। ग्रामीण सरकार, प्रशासन और निगम से मोबाइल टॉवर स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सालों से ग्रामीणों की मांग दरकिनार हो रही है। -दीपू, मैल