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Kullu News: कम बर्फबारी का असर, प्लम के बाद सेब पौधों में आने लगे फूल
Sun, 26 Feb 2023 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 26 Feb 2023 11:07 PM IST
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कुल्लू जिला के खराहल में सेब की अर्ली वैरायटी में समय से पहले हुई फ्लावरिंग।-संवाद
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कुल्लू। सर्दियों में हुई इस बार कम बर्फबारी का असर बागवानी पर दिखने लगा है। मार्च में खिलने वाले फूल अब फरवरी में ही खिल गए हैं। प्लम के पौधों में अर्ली फ्लावरिंग हुई है।
अब बढ़ते तापमान का असर सेब पर भी दिखने लगा है। सेब के पौधों में कहीं-कहीं पर फूल दिखने लगे हैं। हालांकि सेब के अर्ली वैरायटी के पौधों में फूल आए हैं, लेेकिन समय से पहले हो रही फ्लावरिंग को लेकर बागवान हैरान हैं। कम बर्फबारी के कारण इस बार अर्ली फ्लावरिंग से बागवानों में आगामी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि प्लम के पौधों में फूूल आने की प्रक्रिया मार्च से शुरू हो जाती थी। इस बार प्लम के पौधे फरवरी में ही फूलों से लकदक हो चुके हैं। प्लम के पौधों में करीब दो सप्ताह पहले ही घाटी में फूल आए हैं। सेब के पौधों में अब रस चढ़ना शुरू हो गया है। ऐसे में अगर मौसम का यही मिजाज रहता है तो सेब पौधों में जल्दी ही अधिक मात्रा में फ्लावरिंग होगी।
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कुल्लू में 80 फीसदी आबादी बागवानी से जुड़ी है। सेब का 27,000 हेक्टेयर, प्लम का 2,200 हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है। इस संबंध में डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के सहायक निदेशक डॉ. भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि सर्दियों के दौरान इस बार हुई कम बर्फबारी का असर तापमान पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान के चलते प्लम की कुछ वैरायटी में जल्द फूल आए हैं। आने वाले दिनों में बारिश का पूर्वानुमान है, जो कमी रह गई है तो बारिश के आने के बाद पूरी हो सकती है। संवाद
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अब बढ़ते तापमान का असर सेब पर भी दिखने लगा है। सेब के पौधों में कहीं-कहीं पर फूल दिखने लगे हैं। हालांकि सेब के अर्ली वैरायटी के पौधों में फूल आए हैं, लेेकिन समय से पहले हो रही फ्लावरिंग को लेकर बागवान हैरान हैं। कम बर्फबारी के कारण इस बार अर्ली फ्लावरिंग से बागवानों में आगामी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि प्लम के पौधों में फूूल आने की प्रक्रिया मार्च से शुरू हो जाती थी। इस बार प्लम के पौधे फरवरी में ही फूलों से लकदक हो चुके हैं। प्लम के पौधों में करीब दो सप्ताह पहले ही घाटी में फूल आए हैं। सेब के पौधों में अब रस चढ़ना शुरू हो गया है। ऐसे में अगर मौसम का यही मिजाज रहता है तो सेब पौधों में जल्दी ही अधिक मात्रा में फ्लावरिंग होगी।
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कुल्लू में 80 फीसदी आबादी बागवानी से जुड़ी है। सेब का 27,000 हेक्टेयर, प्लम का 2,200 हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है। इस संबंध में डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के सहायक निदेशक डॉ. भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि सर्दियों के दौरान इस बार हुई कम बर्फबारी का असर तापमान पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान के चलते प्लम की कुछ वैरायटी में जल्द फूल आए हैं। आने वाले दिनों में बारिश का पूर्वानुमान है, जो कमी रह गई है तो बारिश के आने के बाद पूरी हो सकती है। संवाद