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Kullu News: आपदा के 15 महीने बाद भी नहीं लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
Mon, 04 Nov 2024 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:13 PM IST
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पार्वती प्रोजेक्ट में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने में देरी से उठ रहे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल
छह महीने पहले आमंत्रित की गई थीं निविदाएं, एक करोड़ 16 लाख रुपये से लगना है सिस्टम
हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण तीन के सिउंड डैम में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने में देरी हो रही है। एक करोड़ 16 लाख रुपये से लगने वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए छह महीने पहले निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। अभी तक यह सिस्टम स्थापित नहीं हो पाया है। अर्ली वार्निंग सिस्टम से सिउंड में डैम के गेट खुलते ही लारजी तक हूटर बजेंगे।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हालात यही रहे तो सैंज घाटी के लोगों को फिर 2023 जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। त्रासदी के 15 महीने बाद भी जमीनी स्तर पर शून्य गतिविधि होने से परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमर उजाला ने 11 सितंबर 2023 के अंक में कुल्लू जिले की जल विद्युत परियोजनाओं में डैम सेफ्टी एक्ट की अवहेलना का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बांध की सुरक्षा पर शोध कर रहे सैंज निवासी मदन शर्मा बताते हैं कि जिले में विद्युत परियोजनाओं में बांध सुरक्षा एक्ट की अवहेलना न हुई होती तो बीते वर्ष नदियों की तबाही से बचा जा सकता था। 10 जुलाई 2023 को बाढ़ ने कुल्लू घाटी में 200 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया था। सैकडों बीघा मलकीयत भूमि तबाह कर दी थी। सरकार ने वर्ष 2014 में प्रदेश की सभी जल विद्युत कंपनियों को अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए थे। नौ वर्षों से पांच में से एक भी परियोजना में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित नहीं हो पाई है। हालांकि, आपदा के बाद सरकार ने प्रदेश में बिजली परियोजनाओं के बांधों में सुरक्षा उपकरण न लगाने पर 21 परियोजनाओं को लीगल नोटिस दिए थे।
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पार्वती परियोजना के महाप्रबंधक प्रकाश चंद ने कहा कि सेंसर बेस्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम का टेंडर लगा दिया गया है। दो महीनों में इसे स्थापित कर दिया जाएगा। सिउंड डैम से लारजी तक नदी के किनारे 5 हूटर लगाए जाएंगे। यह हूटर न सिर्फ बजेगा, बल्कि इससे आवाज के माध्यम से संदेश प्रसारित करने का भी प्रावधान होगा। हूटर ओमनी डायरेक्शनल होगा, जो चारों दिशाओं में सुनाई देगा।
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जिले में एडी हाइड्रो की 192 मेगावाट की एलाइन दुहांगन, मलाणा पावर कंपनी की 86 मेगावाट की क्षमता वाली मलाणा-एक, एवरेस्ट पावर लिमिटेड की 100 मेगावाट की मलाणा-दो, हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की 100 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली सैंज जल विद्युत परियोजना और सिउंड में एनएचपीसी के 520 मेगावाट प्रोजेक्ट का बांध बना हैं। इन पांचों ही बांधों में अर्ली वार्निंग सिस्टम नहीं लगे हैं।
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छह महीने पहले आमंत्रित की गई थीं निविदाएं, एक करोड़ 16 लाख रुपये से लगना है सिस्टम
हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण तीन के सिउंड डैम में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने में देरी हो रही है। एक करोड़ 16 लाख रुपये से लगने वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए छह महीने पहले निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। अभी तक यह सिस्टम स्थापित नहीं हो पाया है। अर्ली वार्निंग सिस्टम से सिउंड में डैम के गेट खुलते ही लारजी तक हूटर बजेंगे।
विशेषज्ञ कहते हैं कि हालात यही रहे तो सैंज घाटी के लोगों को फिर 2023 जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। त्रासदी के 15 महीने बाद भी जमीनी स्तर पर शून्य गतिविधि होने से परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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अमर उजाला ने 11 सितंबर 2023 के अंक में कुल्लू जिले की जल विद्युत परियोजनाओं में डैम सेफ्टी एक्ट की अवहेलना का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बांध की सुरक्षा पर शोध कर रहे सैंज निवासी मदन शर्मा बताते हैं कि जिले में विद्युत परियोजनाओं में बांध सुरक्षा एक्ट की अवहेलना न हुई होती तो बीते वर्ष नदियों की तबाही से बचा जा सकता था। 10 जुलाई 2023 को बाढ़ ने कुल्लू घाटी में 200 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया था। सैकडों बीघा मलकीयत भूमि तबाह कर दी थी। सरकार ने वर्ष 2014 में प्रदेश की सभी जल विद्युत कंपनियों को अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए थे। नौ वर्षों से पांच में से एक भी परियोजना में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित नहीं हो पाई है। हालांकि, आपदा के बाद सरकार ने प्रदेश में बिजली परियोजनाओं के बांधों में सुरक्षा उपकरण न लगाने पर 21 परियोजनाओं को लीगल नोटिस दिए थे।
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पार्वती परियोजना के महाप्रबंधक प्रकाश चंद ने कहा कि सेंसर बेस्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम का टेंडर लगा दिया गया है। दो महीनों में इसे स्थापित कर दिया जाएगा। सिउंड डैम से लारजी तक नदी के किनारे 5 हूटर लगाए जाएंगे। यह हूटर न सिर्फ बजेगा, बल्कि इससे आवाज के माध्यम से संदेश प्रसारित करने का भी प्रावधान होगा। हूटर ओमनी डायरेक्शनल होगा, जो चारों दिशाओं में सुनाई देगा।
जिले में एडी हाइड्रो की 192 मेगावाट की एलाइन दुहांगन, मलाणा पावर कंपनी की 86 मेगावाट की क्षमता वाली मलाणा-एक, एवरेस्ट पावर लिमिटेड की 100 मेगावाट की मलाणा-दो, हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की 100 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली सैंज जल विद्युत परियोजना और सिउंड में एनएचपीसी के 520 मेगावाट प्रोजेक्ट का बांध बना हैं। इन पांचों ही बांधों में अर्ली वार्निंग सिस्टम नहीं लगे हैं।