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Kullu News: कुल्लू में पांच जगह मनाया जाता है दशहरा
Wed, 01 Oct 2025 11:14 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 01 Oct 2025 11:14 PM IST
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कुल्लू में दशहरा उत्सव में वाद्ययंत्रो को बजाते देवलू।-स्ंवाद
मणिकर्ण, ठावा और हरिपुर में निकाली जाएगी भव्य रथयात्रा
जिले में सदियों से परंपरा का किया जा रहा निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू में पांच जगह दशहरा मनाया जाता है। ढालपुर के अलावा मणिकर्ण, नग्गर ठावा, हरिपुर और वशिष्ठ में भी दशहरा मनाया जाता है।
मणिकर्ण, नग्गर ठावा, हरिपुर, वशिष्ठ के दशहरा में सदियों से परंपरा का निर्वहन हो रहा है। मणिकर्ण, हरिपुर के दशहरा में स्थानीय देवी-देवता शामिल होते हैं। ढालपुर में दशहरा के लिए इस बार 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण उत्सव कमेटी ने भेजा है।
खास बात यह है कि मणिकर्ण में बाकायदा कुल्लू के दशहरा की तरह श्रीरामचंद्र जी की रथयात्रा निकलती है। माता नैणा सहित कई देवी-देवता दशहरा की शोभा बढ़ाते हैं। हरिपुर, नग्गर ठावा में भी इस बार रथयात्रा होगी। मान्यता है कि कुल्लू दशहरा की शुरुआत कुल्लू के राजा जगत सिंह ने 17वीं सदी में ब्रह्म हत्या के पाप से बचने के लिए की थी। सात दिन तक होने वाला उत्सव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दशहरा ने कुल्लू की प्राचीन परंपराओं लोकसंगीत, लोकनृत्य और कुल्लवी नृत्य को संजोया है। आज के दौर में दशहरा अब व्यापारिक स्वरूप भी ले चुका है। दशहरा में करोड़ाें का कारोबार होता है। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि दशहरा ने देव परंपरा और संस्कृति को संजोए रखा है।
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नहीं जलाया जाता रावण का पुतला
कुल्लू दशहरा में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते हैं। देशभर में दशहरा समाप्त हो जाता है लेकिन कुल्लू में दशहरा शुरू होता है। एक सप्ताह तक दशहरा में 300 से अधिक देवी-देवता देव परंपरा का निर्वहन करते हैं।
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जिले में सदियों से परंपरा का किया जा रहा निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू में पांच जगह दशहरा मनाया जाता है। ढालपुर के अलावा मणिकर्ण, नग्गर ठावा, हरिपुर और वशिष्ठ में भी दशहरा मनाया जाता है।
मणिकर्ण, नग्गर ठावा, हरिपुर, वशिष्ठ के दशहरा में सदियों से परंपरा का निर्वहन हो रहा है। मणिकर्ण, हरिपुर के दशहरा में स्थानीय देवी-देवता शामिल होते हैं। ढालपुर में दशहरा के लिए इस बार 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण उत्सव कमेटी ने भेजा है।
खास बात यह है कि मणिकर्ण में बाकायदा कुल्लू के दशहरा की तरह श्रीरामचंद्र जी की रथयात्रा निकलती है। माता नैणा सहित कई देवी-देवता दशहरा की शोभा बढ़ाते हैं। हरिपुर, नग्गर ठावा में भी इस बार रथयात्रा होगी। मान्यता है कि कुल्लू दशहरा की शुरुआत कुल्लू के राजा जगत सिंह ने 17वीं सदी में ब्रह्म हत्या के पाप से बचने के लिए की थी। सात दिन तक होने वाला उत्सव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दशहरा ने कुल्लू की प्राचीन परंपराओं लोकसंगीत, लोकनृत्य और कुल्लवी नृत्य को संजोया है। आज के दौर में दशहरा अब व्यापारिक स्वरूप भी ले चुका है। दशहरा में करोड़ाें का कारोबार होता है। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि दशहरा ने देव परंपरा और संस्कृति को संजोए रखा है।
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नहीं जलाया जाता रावण का पुतला
कुल्लू दशहरा में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाए जाते हैं। देशभर में दशहरा समाप्त हो जाता है लेकिन कुल्लू में दशहरा शुरू होता है। एक सप्ताह तक दशहरा में 300 से अधिक देवी-देवता देव परंपरा का निर्वहन करते हैं।
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