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Kullu News: पुराने, जर्जर भवन में मरीजों की नब्ज टटोल रहे चिकित्सक
Fri, 24 Oct 2025 10:10 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 24 Oct 2025 10:10 PM IST
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बंजार अस्पताल में लैब की दीवारों में आई सीलन।-संवाद
बंजार अस्पताल का नया ब्लॉक बनने के बाद भी पुराने में ही चल रही ओपीडी
लैब की हालत ज्यादा खराब, भवन में जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर
अस्पतालन में प्रतिदिन लगभग 200 से 250 मरीजों का होता है इलाज
हरिकृष्ण कौल
बंजार (कुल्लू)। सिविल अस्पताल बंजार की दीवारें खुद बीमार हो गई हैं। अस्पताल के नए भवन का एक ब्लॉक लगभग तैयार है। बावजूद इसके मरीजों का अब भी पुराने, जर्जर भवन में इलाज किया जा रहा है।
पुराने भवन में अस्पताल की प्रयोगशाला की हालत सबसे ज्यादा खराब है। दीवारों में सीलन, जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर और पपड़ी देख यह किसी भी नजरिये से लैब नजर नहीं आती है। यहां मरीजों के खून और अन्य सैंपल के टेस्ट किए जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि खुद लैब किसी बीमार कमरे जैसी लगती है। पुराने भवन में जगह की कमी के कारण अस्पताल में दो डॉक्टर एक ही कमरे में मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं।
बंजार अस्पताल में वर्तमान में छह चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ और तीन सामान्य चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। बंजार अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 से 250 मरीजों का इलाज किया जाता है। सीमित जगह और संसाधनों के बीच डॉक्टरों और स्टाफ पर काम का अतिरिक्त दबाव है। हैरान करने वाली बात है कि अस्पताल का एक नया ब्लॉक लगभग तैयार है लेकिन उसे मरीजों के उपयोग के लिए अब तक नहीं खोला गया है। सोशल मीडिया पर भी बंजार अस्पताल की खस्ताहाल लैब चर्चा का विषय बनी हुई है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
नए भवन के हस्तांतरण की प्रक्रिया के बारे में पत्राचार किया गया है। मरीजों के वार्ड में पेंट का कार्य हो गया है। लोक निर्माण विभाग निचली मंजिल लैब और अन्य कमरों की मरम्मत और पेंट का कार्य करेगा। रोगी कल्याण समिति की बैठक में एसडीएम बंजार की अध्यक्षता में निर्णय लिया गया है। - नीलम शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी, बंजार
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जब नया ब्लॉक लगभग तैयार है तो लैब सहित ओपीडी को भी नए भवन के एक ब्लॉक में शिफ्ट करना चाहिए जिससे मरीजों को परेशानी न हो। इस दिशा में प्रशासन जल्द कदम उठाए। बंजार की 20 से अधिक पंचायतों के लोग यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। -जगदीश पालसरा
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अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन सुविधाएं घटती जा रही हैं। दो डॉक्टर एक ही कमरे में मरीज देखते हैं। लैब की हालत ऐसी है कि जांच करवाने से पहले डर लगता है। दीवारें उखड़ी हैं, फर्श पर नमी रहती है। पुराने जर्जर हिस्से में काम चलाना समझ से परे है। - वीरेंद्र सिंह
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लैब की हालत ज्यादा खराब, भवन में जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर
अस्पतालन में प्रतिदिन लगभग 200 से 250 मरीजों का होता है इलाज
हरिकृष्ण कौल
बंजार (कुल्लू)। सिविल अस्पताल बंजार की दीवारें खुद बीमार हो गई हैं। अस्पताल के नए भवन का एक ब्लॉक लगभग तैयार है। बावजूद इसके मरीजों का अब भी पुराने, जर्जर भवन में इलाज किया जा रहा है।
पुराने भवन में अस्पताल की प्रयोगशाला की हालत सबसे ज्यादा खराब है। दीवारों में सीलन, जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर और पपड़ी देख यह किसी भी नजरिये से लैब नजर नहीं आती है। यहां मरीजों के खून और अन्य सैंपल के टेस्ट किए जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि खुद लैब किसी बीमार कमरे जैसी लगती है। पुराने भवन में जगह की कमी के कारण अस्पताल में दो डॉक्टर एक ही कमरे में मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं।
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बंजार अस्पताल में वर्तमान में छह चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ और तीन सामान्य चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। बंजार अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 से 250 मरीजों का इलाज किया जाता है। सीमित जगह और संसाधनों के बीच डॉक्टरों और स्टाफ पर काम का अतिरिक्त दबाव है। हैरान करने वाली बात है कि अस्पताल का एक नया ब्लॉक लगभग तैयार है लेकिन उसे मरीजों के उपयोग के लिए अब तक नहीं खोला गया है। सोशल मीडिया पर भी बंजार अस्पताल की खस्ताहाल लैब चर्चा का विषय बनी हुई है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
नए भवन के हस्तांतरण की प्रक्रिया के बारे में पत्राचार किया गया है। मरीजों के वार्ड में पेंट का कार्य हो गया है। लोक निर्माण विभाग निचली मंजिल लैब और अन्य कमरों की मरम्मत और पेंट का कार्य करेगा। रोगी कल्याण समिति की बैठक में एसडीएम बंजार की अध्यक्षता में निर्णय लिया गया है। - नीलम शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी, बंजार
जब नया ब्लॉक लगभग तैयार है तो लैब सहित ओपीडी को भी नए भवन के एक ब्लॉक में शिफ्ट करना चाहिए जिससे मरीजों को परेशानी न हो। इस दिशा में प्रशासन जल्द कदम उठाए। बंजार की 20 से अधिक पंचायतों के लोग यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। -जगदीश पालसरा
अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन सुविधाएं घटती जा रही हैं। दो डॉक्टर एक ही कमरे में मरीज देखते हैं। लैब की हालत ऐसी है कि जांच करवाने से पहले डर लगता है। दीवारें उखड़ी हैं, फर्श पर नमी रहती है। पुराने जर्जर हिस्से में काम चलाना समझ से परे है। - वीरेंद्र सिंह