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Kullu News: बारिश और बर्फबारी के बाद डराने लगा डायरिया
Mon, 02 Feb 2026 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:12 PM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में रोजाना दस से 15 मरीजों में सामने आ रहे हैं लक्षण
विशेषज्ञ दे रहे एहतियात बरतने और अस्पताल आकर इलाज करवाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में हो रही बारिश-बर्फबारी से पीलिया और डायरिया के फैलने का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों में मरीजों में इन दोनों बीमारियों के लक्षण मिल रहे हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की मेडिसिन, शिशु और सामान्य ओपीडी में रोजाना इस तरह के लक्षणों वाले दस से 15 मरीज मिल रहे हैं। ...दिन : सोमवार, समय : सुबह 8:30 बजे। ...स्थान : क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू। अस्पताल परिसर में मरीजों का उपचार के लिए आना शुरू हुआ। करीब 9 बजे तक अस्पताल की महिला, पुरुष के अलावा ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर मरीजों की लाइनें लग गईं।
करीब 9:30 बजे तक मेडिसिन, शिशु रोग और महिला-पुरुष सामान्य ओपीडी में मरीजों की भीड़ जुटी। हालांकि, ओपीडी में सुबह 9:30 बजे से ही मरीजों का उपचार शुरू हुआ। समय 11:30 बजे मेडिसिन वार्ड में चिकित्सक भर्ती मरीजों का उपचार कर रहे थे। वार्ड में गैलरी में भी मरीजों के बिस्तर लगे मिले। हालांकि, उपरोक्त सभी ओपीडी में शाम 4 बजे तक मरीजों की भीड़ लगी रही। मेडिसिन विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश होने से डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में घबराएं नहीं, बल्कि रोकथाम के उपाय करके बचाव करें। डायरिया होने पर लगातार दस्त और उल्टियां आती हैं। ऐसे में लापरवाही न बरतें और अस्पताल पहुंचें।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि डायरिया के लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय परामर्श लें और समय पर उपचार करवाएं।
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यह हैं कारण और लक्षण
डायरिया दूषित पानी पीने, वायरल इन्फेक्शन, पेट में बैक्टीरिया का संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, आसपास सफाई ठीक से न होने, कटे फल को खाने तथा पीने वाले पानी के कंटेनर की सफाई न होने से हो सकता है। दिन में लगातार तीन से अधिक बार दस्त आना डायरिया का मुख्य लक्षण होता है। इसे क्रोनिक डायरिया कहते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह खतरनाक होता है। पेट में तेज दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी आना, जल्दी-जल्दी दस्त आना, बुखार आना, कमजोरी महसूस करना और आंखें धंस जाना इसके लक्षण होते हैं।
-- ऐसे हो सकता है बचाव
डायरिया का उपचार सस्ता और काफी आसान है। मरीज को तुरंत ओआरएस या चीनी, नमक और नींबू पानी का घोल लेना चाहिए। यह घोल आसानी से आंतों की ओर से अवशोषित कर लिया जाता है और शरीर में एलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है। इसके अलावा चिकित्सकीय सलाह से उपचार करवाना आवश्यक है।
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विशेषज्ञ दे रहे एहतियात बरतने और अस्पताल आकर इलाज करवाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में हो रही बारिश-बर्फबारी से पीलिया और डायरिया के फैलने का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों में मरीजों में इन दोनों बीमारियों के लक्षण मिल रहे हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की मेडिसिन, शिशु और सामान्य ओपीडी में रोजाना इस तरह के लक्षणों वाले दस से 15 मरीज मिल रहे हैं। ...दिन : सोमवार, समय : सुबह 8:30 बजे। ...स्थान : क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू। अस्पताल परिसर में मरीजों का उपचार के लिए आना शुरू हुआ। करीब 9 बजे तक अस्पताल की महिला, पुरुष के अलावा ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर मरीजों की लाइनें लग गईं।
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करीब 9:30 बजे तक मेडिसिन, शिशु रोग और महिला-पुरुष सामान्य ओपीडी में मरीजों की भीड़ जुटी। हालांकि, ओपीडी में सुबह 9:30 बजे से ही मरीजों का उपचार शुरू हुआ। समय 11:30 बजे मेडिसिन वार्ड में चिकित्सक भर्ती मरीजों का उपचार कर रहे थे। वार्ड में गैलरी में भी मरीजों के बिस्तर लगे मिले। हालांकि, उपरोक्त सभी ओपीडी में शाम 4 बजे तक मरीजों की भीड़ लगी रही। मेडिसिन विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश होने से डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में घबराएं नहीं, बल्कि रोकथाम के उपाय करके बचाव करें। डायरिया होने पर लगातार दस्त और उल्टियां आती हैं। ऐसे में लापरवाही न बरतें और अस्पताल पहुंचें।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि डायरिया के लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय परामर्श लें और समय पर उपचार करवाएं।
यह हैं कारण और लक्षण
डायरिया दूषित पानी पीने, वायरल इन्फेक्शन, पेट में बैक्टीरिया का संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, आसपास सफाई ठीक से न होने, कटे फल को खाने तथा पीने वाले पानी के कंटेनर की सफाई न होने से हो सकता है। दिन में लगातार तीन से अधिक बार दस्त आना डायरिया का मुख्य लक्षण होता है। इसे क्रोनिक डायरिया कहते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह खतरनाक होता है। पेट में तेज दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी आना, जल्दी-जल्दी दस्त आना, बुखार आना, कमजोरी महसूस करना और आंखें धंस जाना इसके लक्षण होते हैं।
डायरिया का उपचार सस्ता और काफी आसान है। मरीज को तुरंत ओआरएस या चीनी, नमक और नींबू पानी का घोल लेना चाहिए। यह घोल आसानी से आंतों की ओर से अवशोषित कर लिया जाता है और शरीर में एलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है। इसके अलावा चिकित्सकीय सलाह से उपचार करवाना आवश्यक है।