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Kullu News: डंप मलबे की जद में धल्यारू, बरसात से पहले सहमे ग्रामीण
Thu, 25 Jun 2026 04:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 25 Jun 2026 04:19 AM IST
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सैंज (कुल्लू)। रैला पंचायत का धल्यारू गांव बिजली परियोजना के डंप किए गए मलबे के कारण खतरे की जद में आ गया है। गांव के ठीक पीछे डंप किया गया मलबा लगातार खिसक रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
लोगों का कहना है कि आने वाले मानसून में यह मलबा कभी भी तबाही का कारण बन सकता है और वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2025 की बरसात के दौरान भी डंप मलबा धंसने लगा था।
उस समय हालात इतने बिगड़ गए थे कि कई परिवारों को रात के अंधेरे में अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा था। अब एक बार फिर बरसात का मौसम नजदीक आते ही गांव के लोगों में डर का माहौल बन गया है।
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पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-2 के निर्माण के दौरान धल्यारू गांव के पीछे करीब 18 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मलबा डंप किया गया था। कई वर्षों तक यह मलबा यहीं जमा रहा लेकिन दो वर्षों से इसके खिसकने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यह मलबा धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना प्रबंधन और प्रशासन ने अब तक इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया है। उनका कहना है कि यदि बरसात के दौरान मलबा बड़े स्तर पर खिसका तो गांव में भारी तबाही मच सकती है। इसके बावजूद अभी तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
छापे राम नेगी, डाबे राम नेगी, ठाकर दास, लुदर चंद नेगी, एले राम नेगी, जय राम नेगी और सुख दयाल नेगी समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि पिछले साल की घटना से न तो प्रशासन ने सबक लिया और न ही एनएचपीसी प्रबंधन ने सीख ली।
उनका आरोप है कि बीते एक वर्ष में धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। डंपिंग साइट से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया, जिससे लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते डंपिंग साइट को सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह मलबा बरसात के दौरान ग्रामीणों पर आफत बनकर टूट सकता है।
डंपिंग साइट के खतरे को दूर करने के लिए एनएचपीसी प्रबंधन और वन विभाग को आदेश दिए गए हैं, ताकि मानसून में होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इस संदर्भ में उचित कार्रवाई की जाएगी। -पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी, बंजार
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लोगों का कहना है कि आने वाले मानसून में यह मलबा कभी भी तबाही का कारण बन सकता है और वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2025 की बरसात के दौरान भी डंप मलबा धंसने लगा था।
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उस समय हालात इतने बिगड़ गए थे कि कई परिवारों को रात के अंधेरे में अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा था। अब एक बार फिर बरसात का मौसम नजदीक आते ही गांव के लोगों में डर का माहौल बन गया है।
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पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-2 के निर्माण के दौरान धल्यारू गांव के पीछे करीब 18 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मलबा डंप किया गया था। कई वर्षों तक यह मलबा यहीं जमा रहा लेकिन दो वर्षों से इसके खिसकने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यह मलबा धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना प्रबंधन और प्रशासन ने अब तक इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया है। उनका कहना है कि यदि बरसात के दौरान मलबा बड़े स्तर पर खिसका तो गांव में भारी तबाही मच सकती है। इसके बावजूद अभी तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
छापे राम नेगी, डाबे राम नेगी, ठाकर दास, लुदर चंद नेगी, एले राम नेगी, जय राम नेगी और सुख दयाल नेगी समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि पिछले साल की घटना से न तो प्रशासन ने सबक लिया और न ही एनएचपीसी प्रबंधन ने सीख ली।
उनका आरोप है कि बीते एक वर्ष में धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। डंपिंग साइट से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया, जिससे लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते डंपिंग साइट को सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह मलबा बरसात के दौरान ग्रामीणों पर आफत बनकर टूट सकता है।
डंपिंग साइट के खतरे को दूर करने के लिए एनएचपीसी प्रबंधन और वन विभाग को आदेश दिए गए हैं, ताकि मानसून में होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इस संदर्भ में उचित कार्रवाई की जाएगी। -पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी, बंजार