दशहरा उत्सव से दूर रहते हैं लगघाटी के देवता
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देवी-देवताओं के महाकुंभ में जिला के दूरदराज क्षेत्रों से देवी-देवता अठारह करडूृ की सौह ढालपुर मैदान पहुंचते हैं। वहीं जिला मुख्यालय के साथ लगती लगघाटी के अधिकतर देवी देवता दशहरा उत्सव से दूर रहते हैं। लगघाटी के आधा दर्जन से अधिक देवी-देवता दशहरा उत्सव में शिरकत नहीं करते हैं। इन देवताओं द्वारा सदियों से प्राचीन परंपरा का पालन किया जा रहा है। दूसरी ओर आनी व निरमंड से भी देवता दशहरा उत्सव में शरीक होते हैं। लगघाटी के भल्याणी के देवता श्रीकृष्ण, पिछला ग्रामंग के देवता त्रिजुगी नारायण, अगला ग्रामंग के पंचाली नारायण, फलाण के देवता फलाणी नारायण, हुरंग के देवता हुरगू नारायण, कशामटी की माता नौणी और तिउन की माता फूंगणी जो लगघाटी के प्रमुख देवता दशहरा उत्सव में नहीं आते हैं। इन सभी देवताओं के रथ नहीं बल्कि करडू हैं। देवता अधिकतर भीड़ भड़केे से दूरी रखते हैं।
वहीं देवलुओं को भी देवताओं के आदेशों का पालन करना पड़ता है। देवता के आदेश न मानने पर देवता दंडित करते हैं। हालांकि लगघाटी के डुगीलघ से संबंध रखने वाली माता भागासिद्ध, भुट्टी और शालंग के देवता थान तथा दड़का के देवता फलाणी नारायण दशहरा उत्सव में शामिल होते हैं। इन देवताओं के रथ हैं। यह देवताओं सात दिनों ढालपुर मैदान में ही डेरा जमाते हैं। इधर, देवी जिला देवी देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि देव परंपराओं का सदियों से निर्वहन किया जा रहा है। देवी देवता कारदार संघ इसका पक्षधर है। देव परंपराओं के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
दशहरा उत्सव में शामिल न होने को लेकर ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में एक बार भल्याणी के देवता श्रीकृष्ण जिन्हें बड़ा देवता के नाम से जाना जाता है। दशहरे में शामिल होने के लिए आ रहे थे। इस दौरान लगघाटी के दड़का के समीप कृष्ण मूर्ति के पास जैसे ही देवता पहुंचे तो इस दौरान लोहे के ओलों की बरसात हुई। जिसके बाद देवता यहीं से वापस लौटे। घाटी के प्रमुख देवताओं द्वारा दशहरा में न आने की परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है। दशहरा उत्सव में शिकरत न करने वाले यह देवता अधिकतर भीड़ से दूर रहते हैं। देवता तथा देवता के देवलुओं को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। देवताओं के पास चमड़ा, बीड़ी सिगरेट आदि चीजें निषेध है। लगघाटी में देवताओं के नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को देवता दंडित करते हैं।