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Kullu News: माता हिडिंबा के दर शीश नवाने पहुंच रहे श्रद्धालु
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कुल्लू दशहरा उत्सव में मोहल्ला के मौके पर निकले देवी-देवताओ और देवलू।-संवाद
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव आस्था, परंपरा और देव संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में मनाया जा रहा है। ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं के आगमन के साथ ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है। देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में रोजाना श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
माता हिडिंबा, बिजली महादेव और भगवान रघुनाथ के शिविर में बड़ी संख्या में लोग शीश नवाने पहुंच रहे हैं। दशहरा उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में जगह-जगह सजे देवी-देवताओं के शिविर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कुल्लू दशहरा की खासियत यह है कि यहां उत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घाटी की सदियों पुरानी देव परंपराएं भी जीवंत होती हैं। विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ दशहरा उत्सव में भाग लेने पहुंचते हैं। देव मिलन की परंपरा निभाई जाती है।
माता हिडिंबा के शिविर में भक्तों की खूब रौनक देखने को मिल रही है। माता हिडिंबा के गूर देवी चंद ने बताया कि शिविर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों में माता के प्रति गहरी आस्था है। भगवान रघुनाथ के शिविर में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे देवलुओं, देव रथों और वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच कुल्लू की समृद्ध देव संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिल रही है।
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माता हिडिंबा, बिजली महादेव और भगवान रघुनाथ के शिविर में बड़ी संख्या में लोग शीश नवाने पहुंच रहे हैं। दशहरा उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में जगह-जगह सजे देवी-देवताओं के शिविर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कुल्लू दशहरा की खासियत यह है कि यहां उत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घाटी की सदियों पुरानी देव परंपराएं भी जीवंत होती हैं। विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ दशहरा उत्सव में भाग लेने पहुंचते हैं। देव मिलन की परंपरा निभाई जाती है।
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माता हिडिंबा के शिविर में भक्तों की खूब रौनक देखने को मिल रही है। माता हिडिंबा के गूर देवी चंद ने बताया कि शिविर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों में माता के प्रति गहरी आस्था है। भगवान रघुनाथ के शिविर में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे देवलुओं, देव रथों और वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच कुल्लू की समृद्ध देव संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिल रही है।
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