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Kullu News: मां, भाई से मिलन कर पेड़चा रवाना हुए देव मार्कंडेय ऋषि
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गड़सा घाटी के मकराहड़ में अपनी धरती मां का आशीर्वाद व बड़े भाई से मिलने के बाद देवालय लौटते म
फोटो सहित.........
मकराहड़ में किया शाही स्नान, देवलुओं के साथ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
थरास में तीन दिवसीय मेले का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बंजार की तीन कोठी सराज के अधिष्ठाता देवता मार्कंडेय ऋषि पेड़चा अपनी धरती मां और बड़े भाई महर्षि मार्कंडेय थरास का आशीर्वाद लेकर देवालय लौट गए हैं। थरास मेले में आए देवता मार्कंडेय ऋषि पेड़चा शुक्रवार को मेले के अंतिम दिन सुबह करीब 10:00 बजे ऐतिहासिक एवं देव स्थल मकराहड़ पहुंचे।
यहां एक घंटे तक मंदिर में ऐतिहासिक देव संस्कृति की रस्म को निभाया। इसके बाद देव रथ पूरे लाव लश्कर के साथ ब्यास और गोमती नदी के संगम स्थल पर पहुंचा और शाही स्नान किया। इस दौरान देवता के साथ आए हजारों लोगों ने भी पवित्र स्थल पर आस्था की डुबकी लगाई। बाद में देवता मकराहड़ के समीप उस खेत में गए जहां ऋषि मार्कंडेय प्रकट हुए थे। यहां देवता का रथ भूमि पर लेट कर तीन बार अपनी धरती मां से भावनात्मक मिलन कर देवलुओं को भी भाव विभोर कर दिया।
सात साल बाद मां से हुए मिलन के बाद देवता पेड़चा के लिए रवाना हुए। थरास से तीन दिवसीय मेले का भी समापन हो गया है। इस दौरान मार्कंडेय ऋषि थरास के कारदार जीवन प्रकाश, मंदिर कमेटी के प्रधान पृथी सिंह पाल, इंद्र सिंह, शिवराम शर्मा, बलदेव शर्मा, बालमकुंद नेगी, मार्कंडेय ऋषि पेड़चा के कारदार रमेश शर्मा, कमली राम, टीसी महंत सहित कई देवता के कारकूनों ने भाग लिया। संवाद
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मकराहड़ में किया शाही स्नान, देवलुओं के साथ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
थरास में तीन दिवसीय मेले का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बंजार की तीन कोठी सराज के अधिष्ठाता देवता मार्कंडेय ऋषि पेड़चा अपनी धरती मां और बड़े भाई महर्षि मार्कंडेय थरास का आशीर्वाद लेकर देवालय लौट गए हैं। थरास मेले में आए देवता मार्कंडेय ऋषि पेड़चा शुक्रवार को मेले के अंतिम दिन सुबह करीब 10:00 बजे ऐतिहासिक एवं देव स्थल मकराहड़ पहुंचे।
यहां एक घंटे तक मंदिर में ऐतिहासिक देव संस्कृति की रस्म को निभाया। इसके बाद देव रथ पूरे लाव लश्कर के साथ ब्यास और गोमती नदी के संगम स्थल पर पहुंचा और शाही स्नान किया। इस दौरान देवता के साथ आए हजारों लोगों ने भी पवित्र स्थल पर आस्था की डुबकी लगाई। बाद में देवता मकराहड़ के समीप उस खेत में गए जहां ऋषि मार्कंडेय प्रकट हुए थे। यहां देवता का रथ भूमि पर लेट कर तीन बार अपनी धरती मां से भावनात्मक मिलन कर देवलुओं को भी भाव विभोर कर दिया।
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सात साल बाद मां से हुए मिलन के बाद देवता पेड़चा के लिए रवाना हुए। थरास से तीन दिवसीय मेले का भी समापन हो गया है। इस दौरान मार्कंडेय ऋषि थरास के कारदार जीवन प्रकाश, मंदिर कमेटी के प्रधान पृथी सिंह पाल, इंद्र सिंह, शिवराम शर्मा, बलदेव शर्मा, बालमकुंद नेगी, मार्कंडेय ऋषि पेड़चा के कारदार रमेश शर्मा, कमली राम, टीसी महंत सहित कई देवता के कारकूनों ने भाग लिया। संवाद
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