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Kullu News: नाटक से उजागर कीं लोकतांत्रिक खामियां
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जमोट गांव में कहानियों की कहानी नाटक का शानदार मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी के बिस्मिल्लाह खां युवा सम्मान तथा हिमाचल गौरव पुरस्कार सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर ने अपने सधे अभिनय से लोकतांत्रिक व्यवस्था की खामियों पर करारा व्यंग्य कसा। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन ने संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के सहयोग से जमोट गांव में नाटक ‘कहानियों की कहानी’ का शानदार मंचन किया। नाटक आज की अव्यवस्थित जिंदगी की तुलना प्राचीन काल में भारतवर्ष की आश्रम व्यवस्था तथा गुरुकुल शिक्षा के साथ करता है।
नाटक की कहानी तथा परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए तीन अन्य कहानियों का सहारा लिया गया है। इसमें पहली कहानी हरिशंकर परसाई की भेड़ और भेड़िये, दूसरी केशव चंद्र की जामुन का पेड़ तथा तीसरी कहानी परसाई की ही वैष्णव की फिसलन रही। जंगल में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अपनी सुरक्षा के लिए भेड़ भेड़िये को प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन प्रतिनिधि बनते ही कानून बनाया जाता है कि नाश्ते में भेड़ का बच्चा, लंच में पूरी भेड़ और शाम को आधी भेड़ देनी होगी।
ऐसे में भेड़ें भेड़िये को प्रतिनिधि चुनकर पछताती हैं। इसी प्रकार जामुन के पेड़ में एक बेचारा कवि कलाकार तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही की वजह से अपनी जान गवां बैठता है। तीसरी कहानी में एक वैष्णव अपना धंधा चमकाने के लिए भगवान का ही इस्तेमाल कर जाता है। इस दौरान परमानंद, मीनाक्षी, आलोक, रेवत राम विक्की, पायल, आंचल, वेद प्रकाश और जीवानंद आदि उपस्थित रहे। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी के बिस्मिल्लाह खां युवा सम्मान तथा हिमाचल गौरव पुरस्कार सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर ने अपने सधे अभिनय से लोकतांत्रिक व्यवस्था की खामियों पर करारा व्यंग्य कसा। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन ने संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के सहयोग से जमोट गांव में नाटक ‘कहानियों की कहानी’ का शानदार मंचन किया। नाटक आज की अव्यवस्थित जिंदगी की तुलना प्राचीन काल में भारतवर्ष की आश्रम व्यवस्था तथा गुरुकुल शिक्षा के साथ करता है।
नाटक की कहानी तथा परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए तीन अन्य कहानियों का सहारा लिया गया है। इसमें पहली कहानी हरिशंकर परसाई की भेड़ और भेड़िये, दूसरी केशव चंद्र की जामुन का पेड़ तथा तीसरी कहानी परसाई की ही वैष्णव की फिसलन रही। जंगल में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अपनी सुरक्षा के लिए भेड़ भेड़िये को प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन प्रतिनिधि बनते ही कानून बनाया जाता है कि नाश्ते में भेड़ का बच्चा, लंच में पूरी भेड़ और शाम को आधी भेड़ देनी होगी।
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ऐसे में भेड़ें भेड़िये को प्रतिनिधि चुनकर पछताती हैं। इसी प्रकार जामुन के पेड़ में एक बेचारा कवि कलाकार तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही की वजह से अपनी जान गवां बैठता है। तीसरी कहानी में एक वैष्णव अपना धंधा चमकाने के लिए भगवान का ही इस्तेमाल कर जाता है। इस दौरान परमानंद, मीनाक्षी, आलोक, रेवत राम विक्की, पायल, आंचल, वेद प्रकाश और जीवानंद आदि उपस्थित रहे। संवाद
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