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दिलासा देने वालों की भी छलक पड़ी आंखें
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खस्ताहाल सड़क ने लील लिए तीन नौजवान
भेखली-व्यासर सड़क पर हादसे के बाद फिर खस्ताहाल सड़कों पर उठे सवाल
पैरापिट होते तो टल सकता था हादसा, कई स्थानों पर डंगे तक नहीं
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़, जिदौड़ में हर आंख नम
अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। घाटी में खस्ताहाल सड़कें अकाल लोगों की मौत का कारण बन रही हैं। भेखली कार हादसे में भी सड़क की हालत को दोषी ठहराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे पैरापिट और डंगों का अभाव है। भेखली-व्यासर सड़क पर कार हादसे ने एक बार फिर खस्ता हालत सड़कों की पोल खोल दी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहद खराब है। पैरापिट सड़क के किनारे होते तो शायद तीन युवक अकाल मौत नहीं मरते। इस हादसे में एक ही गांव के तीन युवकों की जान चली गई। युवकों की मौत के बाद गांव में मातम है। परिजनों और रिश्तेदारों के आंसू थम नहीं रहे। ग्रामीण भी हादसे से स्तब्ध हैं। तीनों युवकों के एक साथ चले जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तीनों के शव गांव में पहुंचते ही चीखो-पुकार मच गई। रूपेंद्र, रूप लाल और युधिष्ठिर के लिए हर आंख नम थी।
जिदौड़ पंचायत के प्रधान गंगा राम और नलाच पंचायत के पूर्व प्रधान तारा चंद नेगी ने कहा कि तीन युवकों में से दो की शादी हो गई है। बीस साल का युधिष्ठिर अभी अविवाहित था। रूप लाल अपने पीछे पत्नी सहित ढाई साल के बच्चे को छोड़ गया है। रूपेंद्र के दो बच्चों के सिर पर बाप का साया उठ गया है। पंचायत प्रतिनिधियों सहित लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे पैरापिट और डंगा लगा होता तो हादसा टल सकता था। सभी मृतकों का वीरवार को सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में जिदौड़ नाले में दाह संस्कार कर दिया गया।
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भेखली-व्यासर सड़क पर हादसे के बाद फिर खस्ताहाल सड़कों पर उठे सवाल
पैरापिट होते तो टल सकता था हादसा, कई स्थानों पर डंगे तक नहीं
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़, जिदौड़ में हर आंख नम
अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। घाटी में खस्ताहाल सड़कें अकाल लोगों की मौत का कारण बन रही हैं। भेखली कार हादसे में भी सड़क की हालत को दोषी ठहराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे पैरापिट और डंगों का अभाव है। भेखली-व्यासर सड़क पर कार हादसे ने एक बार फिर खस्ता हालत सड़कों की पोल खोल दी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहद खराब है। पैरापिट सड़क के किनारे होते तो शायद तीन युवक अकाल मौत नहीं मरते। इस हादसे में एक ही गांव के तीन युवकों की जान चली गई। युवकों की मौत के बाद गांव में मातम है। परिजनों और रिश्तेदारों के आंसू थम नहीं रहे। ग्रामीण भी हादसे से स्तब्ध हैं। तीनों युवकों के एक साथ चले जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तीनों के शव गांव में पहुंचते ही चीखो-पुकार मच गई। रूपेंद्र, रूप लाल और युधिष्ठिर के लिए हर आंख नम थी।
जिदौड़ पंचायत के प्रधान गंगा राम और नलाच पंचायत के पूर्व प्रधान तारा चंद नेगी ने कहा कि तीन युवकों में से दो की शादी हो गई है। बीस साल का युधिष्ठिर अभी अविवाहित था। रूप लाल अपने पीछे पत्नी सहित ढाई साल के बच्चे को छोड़ गया है। रूपेंद्र के दो बच्चों के सिर पर बाप का साया उठ गया है। पंचायत प्रतिनिधियों सहित लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे पैरापिट और डंगा लगा होता तो हादसा टल सकता था। सभी मृतकों का वीरवार को सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में जिदौड़ नाले में दाह संस्कार कर दिया गया।
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