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एक दशक से नहीं हुआ ब्यास नदी का तटीकरण
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कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू की जीवनदायिनी ब्यास नदी के तटीकरण की योजना लोकसभा के उपचुनाव में प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकती है। वोट मांगने के लिए आने वाले उम्मीदवारों को अब दशक से ठंडे बस्ते में पड़ी योजना पर जवाब देना होगा।
लोगों को तटीकरण के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। तटीकरण न होने से बाढ़ आने से नदी तबाही मचा देती है। इससे करोड़ों का नुकसान हो जाता है। वर्ष 1995, 2000 और 18 सितंबर 2018 में भी बाढ़ आने से ब्यास नदी ने काफी नुकसान किया है। जिला कुल्लू के हजारों लोगों को बाढ़ का खतरा बना रहता है। ब्यास के साथ बसे लोगों को बाढ़ का खौफ बना रहता है। हर चुनाव में नदी के तटीकरण योजना को सिरे चढ़ने की आस रहती है। लेकिन चुनाव के बाद सभी राजनीतिक दल के नुमाइंदे इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। ऐसे में नदी में बाढ़ आने पर लोगों को जानमाल के नुकसान का खतरा रहता है। बाढ़ आने पर नदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। ब्यास नदी के किनारे पलचान से लेकर औट तक हजारों की आबादी बसती है। लेकिन तटीकरण न किए जाने से यह कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। सितंबर 2018 में ब्यास में आई भयंकर बाढ़ से मनाली से लेकर औट तक भारी तबाही मची थी। पतलीकूहल, अखाड़ा बाजार, लंकाबेकर,ज्वाणी रोपा, भुंतर सहित अन्य जगहों को खाली करना पड़ा था। इसके साथ ही करोड़ों की संपत्ति को ब्यास नदी अपने साथ बहाकर ले गई थी। उस समय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर ब्यास के तटीकरण को लेकर आश्वासन दिया था। सरकार के नुमाइंदों का कहना है कि केंद्र सरकार जल संरक्षण परियोजना के तहत तटीकरण पर करोड़ों खर्च किए जाएंगे। प्रदेश सरकार के रवैये को देखते हुए यही लग रहा है कि वह ब्यास के तटीकरण को लेकर गंभीर नहीं है। प्रताप सिंह, चमन ठाकुर प्रेम ठाकुर तथा कमल आदि का कहना है कि जलशक्ति विभाग की यह स्कीम एक दशक पुरानी है। हर चुनावों के दौरान तटीकरण की बात करते है। लेकिन इसके लिए बजट का प्रावधान अभी नहीं हो सका है। इस उप चुनाव में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
तटीकरण पर करोड़ों होंगे खर्च
शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर कहते हैं कि नदियों के तटीकरण के लिए करोड़ों की राशि मंजूर की गई है। इसके तहत पलचान से औट तक ब्यास के तटीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार प्रयासरत है।
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चार साल में नहीं हुआ बजट का प्रावधान
सदर विधायक सुंदर ठाकुर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सरकार के मंत्री ने कहा था कि 585 करोड़ से ब्यास नदी का तटीकरण किया जाएगा। लेकिन अभी तक परियोजना की फाइल धुल फांक रही है। मंत्री महज दिखावा ही दिखाते हैं।
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लोगों को तटीकरण के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। तटीकरण न होने से बाढ़ आने से नदी तबाही मचा देती है। इससे करोड़ों का नुकसान हो जाता है। वर्ष 1995, 2000 और 18 सितंबर 2018 में भी बाढ़ आने से ब्यास नदी ने काफी नुकसान किया है। जिला कुल्लू के हजारों लोगों को बाढ़ का खतरा बना रहता है। ब्यास के साथ बसे लोगों को बाढ़ का खौफ बना रहता है। हर चुनाव में नदी के तटीकरण योजना को सिरे चढ़ने की आस रहती है। लेकिन चुनाव के बाद सभी राजनीतिक दल के नुमाइंदे इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। ऐसे में नदी में बाढ़ आने पर लोगों को जानमाल के नुकसान का खतरा रहता है। बाढ़ आने पर नदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। ब्यास नदी के किनारे पलचान से लेकर औट तक हजारों की आबादी बसती है। लेकिन तटीकरण न किए जाने से यह कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। सितंबर 2018 में ब्यास में आई भयंकर बाढ़ से मनाली से लेकर औट तक भारी तबाही मची थी। पतलीकूहल, अखाड़ा बाजार, लंकाबेकर,ज्वाणी रोपा, भुंतर सहित अन्य जगहों को खाली करना पड़ा था। इसके साथ ही करोड़ों की संपत्ति को ब्यास नदी अपने साथ बहाकर ले गई थी। उस समय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर ब्यास के तटीकरण को लेकर आश्वासन दिया था। सरकार के नुमाइंदों का कहना है कि केंद्र सरकार जल संरक्षण परियोजना के तहत तटीकरण पर करोड़ों खर्च किए जाएंगे। प्रदेश सरकार के रवैये को देखते हुए यही लग रहा है कि वह ब्यास के तटीकरण को लेकर गंभीर नहीं है। प्रताप सिंह, चमन ठाकुर प्रेम ठाकुर तथा कमल आदि का कहना है कि जलशक्ति विभाग की यह स्कीम एक दशक पुरानी है। हर चुनावों के दौरान तटीकरण की बात करते है। लेकिन इसके लिए बजट का प्रावधान अभी नहीं हो सका है। इस उप चुनाव में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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तटीकरण पर करोड़ों होंगे खर्च
शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर कहते हैं कि नदियों के तटीकरण के लिए करोड़ों की राशि मंजूर की गई है। इसके तहत पलचान से औट तक ब्यास के तटीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार प्रयासरत है।
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चार साल में नहीं हुआ बजट का प्रावधान
सदर विधायक सुंदर ठाकुर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सरकार के मंत्री ने कहा था कि 585 करोड़ से ब्यास नदी का तटीकरण किया जाएगा। लेकिन अभी तक परियोजना की फाइल धुल फांक रही है। मंत्री महज दिखावा ही दिखाते हैं।