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सोलंग में सात साल में नहीं बना पुल
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मनाली के सोलंग गांव को सात साल से बन रहा पूल अभी भी अधूरा है।-संवाद
- फोटो : Kullu
आजादी के 75 साल बाद भी पर्यटन नगरी मनाली का सोलंग गांव देश-दुनिया से कटा हुआ है। ब्यास नदी पर बन रहे स्थायी पुल का काम सात साल से अधूरा है, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। यहां पर 500 की आबादी की जिंदगियां अस्थायी पुल के सहारे ही टिकी है। ठेकेदार की लेटलतीफी के कारण पुल का काम कछुआ गति में चला है। ब्यास के ऊपर बना अस्थायी पुल हर बरसात में बह जाता है। हाल ही में 15 अगस्त को लकड़ी की अस्थायी पुलिया ब्यास में बह गई थी। इसमें दो किशोर भी तेज बहाव में बह गए और उनकी मौत हो गई। प्रदेश सरकार और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
कुल्लू। मनाली से 22 किलोमीटर दूर सोलंग गांव के लिए ब्यास नदी पर बन रहा पुल ग्रामीणों के लिए गले की फांस बना है। सालों बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं किया गया है।
इससे सैकड़ों ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का उफनती ब्यास पर लकड़ी के अस्थायी पुलों और पुलियों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। बीते एक दशक में बरसात के कारण ब्यास नदी पर बनी कई पुल और पुलिया बह गई है। इस अधूरे पुल के निर्माण पर लगभग 2.91 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते काम धीमी गति में चला हुआ है। प्रदेश सरकार और प्रशासन ने भी कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं। इससे लोग जान जोखिम में डालकर झूले पुल पर बैठकर ब्यास को पा कर रहे हैं। हालांकि इस गांव के लिए सड़क तो बन रही है, लेकिन पुल नहीं बन रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार हर बरसात में पुलिया बह जाती है। ब्यास नदी के उस पार बसे सोलंग गांव तक पहुंचने के दो साधन ही हैं। एक रज्जू मार्ग (झूला पुल) और दूसरा ब्यास नदी पर बनीं अस्थाई पुलिया। ग्रामीणों द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद ब्रिज के निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई है। इस पर प्रशासन द्वारा ठेकेदार को 20 फीसदी पेनल्टी भी लगाई है।
15 अगस्त को फिर बही थी पुलिया,
दो किशारों की लील थी जिंदगी
15 अगस्त को भारी बरसात के चलते ब्यास पर बनी अस्थायी पुलिया तेज बहाव में बह गई थी। इससे दो किशोरों की मौत हो गई। हादसे से चार दिन पहले ही इसे बनाया गया था। दो किशोरों की मौत के बाद ग्रामीण भी सरकार और लोक निर्माण विभाग पर भड़क गए। उनके विरोध में जमकर प्रदर्शन भी किया। ग्रामीण सुरेश कुमार और योगराज ने कहा कि सड़क निर्माण का कार्य सात साल पहले मंजूर हुआ है। पुल का काम भी शुरू हुआ, लेकिन अभी तक यह पुल बनकर तैयार नहीं हो रहा है।
स्पेन के सहारे उस पार पहुंच रही फसलें
सोलंग गांव के ग्रामीण मजबूरी में स्पेन के माध्यम से ही फसलों को ब्यास नदी के दूसरी ओर पहुंचा रहे हैं। इससे भारी परेशानी हो रही है। यह सिलसिला कई सालों से चला है। ग्रामीणों को स्पेन में एक चक्कर का लगभग 50 रुपये तक किराया चुकाना पड़ रहा है। इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अगर यह स्थायी पुल समय पर तैयार हो जाता तो उनकी फसल आसानी से पुल के दूसरी ओर पहुंच जाती। इन दिनों सेब सीजन भी जोरों पर है, लेकिन स्पेन पर सेब भेजने के अलावा उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है।
ठेकेदार की लेटलतीफी से हुई देरी
सोलंग गांव के निर्माणाधीन पुल के कार्य पर ठेकेदार की लेटलतीफी की वजह से देरी हुई है। सोलंग गांव को सड़क से जोड़ने के लिए विधायक प्राथमिकता में डाला है। ठेकेदार को नोटिस दिए हैं। उस पर 20 प्रतिशत की पेनल्टी भी लगाई है।
गोविंद सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री।
अस्थायी पुलिया की भेजी रिपोर्ट
सोलंग गांव के लिए अस्थायी पुलिया बनाई जाएगी। इसका प्राक्कलन उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। बजट का प्रावधान होने पर काम तुरंत शुरू होगा। सोलंग गांव को बन रहे पुल को लेकर ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
अनूप शर्मा, अधिशासी अभियंता लोनिवि कटराईं
कई बार उठाया मुद्दा
सोलंग पुल की समस्या को कांग्रेस ने कई बार उठाया। इसके बावजूद प्रदेश सरकार और शिक्षा मंत्री के कान में जूं तक नहीं रेंगी है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार की नालायकी के कारण यहां पर हाल ही में हादसा हुआ है और ग्रामीण भी सुविधा से वंचित हैं।
हरि चंद शर्मा, अध्यक्ष मनाली मंडल कांग्रेस। संवाद
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कुल्लू। मनाली से 22 किलोमीटर दूर सोलंग गांव के लिए ब्यास नदी पर बन रहा पुल ग्रामीणों के लिए गले की फांस बना है। सालों बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं किया गया है।
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इससे सैकड़ों ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का उफनती ब्यास पर लकड़ी के अस्थायी पुलों और पुलियों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। बीते एक दशक में बरसात के कारण ब्यास नदी पर बनी कई पुल और पुलिया बह गई है। इस अधूरे पुल के निर्माण पर लगभग 2.91 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते काम धीमी गति में चला हुआ है। प्रदेश सरकार और प्रशासन ने भी कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं। इससे लोग जान जोखिम में डालकर झूले पुल पर बैठकर ब्यास को पा कर रहे हैं। हालांकि इस गांव के लिए सड़क तो बन रही है, लेकिन पुल नहीं बन रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार हर बरसात में पुलिया बह जाती है। ब्यास नदी के उस पार बसे सोलंग गांव तक पहुंचने के दो साधन ही हैं। एक रज्जू मार्ग (झूला पुल) और दूसरा ब्यास नदी पर बनीं अस्थाई पुलिया। ग्रामीणों द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद ब्रिज के निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई है। इस पर प्रशासन द्वारा ठेकेदार को 20 फीसदी पेनल्टी भी लगाई है।
15 अगस्त को फिर बही थी पुलिया,
दो किशारों की लील थी जिंदगी
15 अगस्त को भारी बरसात के चलते ब्यास पर बनी अस्थायी पुलिया तेज बहाव में बह गई थी। इससे दो किशोरों की मौत हो गई। हादसे से चार दिन पहले ही इसे बनाया गया था। दो किशोरों की मौत के बाद ग्रामीण भी सरकार और लोक निर्माण विभाग पर भड़क गए। उनके विरोध में जमकर प्रदर्शन भी किया। ग्रामीण सुरेश कुमार और योगराज ने कहा कि सड़क निर्माण का कार्य सात साल पहले मंजूर हुआ है। पुल का काम भी शुरू हुआ, लेकिन अभी तक यह पुल बनकर तैयार नहीं हो रहा है।
स्पेन के सहारे उस पार पहुंच रही फसलें
सोलंग गांव के ग्रामीण मजबूरी में स्पेन के माध्यम से ही फसलों को ब्यास नदी के दूसरी ओर पहुंचा रहे हैं। इससे भारी परेशानी हो रही है। यह सिलसिला कई सालों से चला है। ग्रामीणों को स्पेन में एक चक्कर का लगभग 50 रुपये तक किराया चुकाना पड़ रहा है। इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अगर यह स्थायी पुल समय पर तैयार हो जाता तो उनकी फसल आसानी से पुल के दूसरी ओर पहुंच जाती। इन दिनों सेब सीजन भी जोरों पर है, लेकिन स्पेन पर सेब भेजने के अलावा उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है।
ठेकेदार की लेटलतीफी से हुई देरी
सोलंग गांव के निर्माणाधीन पुल के कार्य पर ठेकेदार की लेटलतीफी की वजह से देरी हुई है। सोलंग गांव को सड़क से जोड़ने के लिए विधायक प्राथमिकता में डाला है। ठेकेदार को नोटिस दिए हैं। उस पर 20 प्रतिशत की पेनल्टी भी लगाई है।
गोविंद सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री।
अस्थायी पुलिया की भेजी रिपोर्ट
सोलंग गांव के लिए अस्थायी पुलिया बनाई जाएगी। इसका प्राक्कलन उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। बजट का प्रावधान होने पर काम तुरंत शुरू होगा। सोलंग गांव को बन रहे पुल को लेकर ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
अनूप शर्मा, अधिशासी अभियंता लोनिवि कटराईं
कई बार उठाया मुद्दा
सोलंग पुल की समस्या को कांग्रेस ने कई बार उठाया। इसके बावजूद प्रदेश सरकार और शिक्षा मंत्री के कान में जूं तक नहीं रेंगी है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार की नालायकी के कारण यहां पर हाल ही में हादसा हुआ है और ग्रामीण भी सुविधा से वंचित हैं।
हरि चंद शर्मा, अध्यक्ष मनाली मंडल कांग्रेस। संवाद