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Kullu News: जापानी फल पर काला धब्बा बना बागवानों के लिए चुनौती
Wed, 03 Dec 2025 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 03 Dec 2025 11:13 PM IST
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जिला में 30 फीसदी जापानी फल पर लगा काला धब्बा रोग। संवाद
जिले में 30 फीसदी फसल रोग के कारण हुई क्षतिग्रस्त
जापानी में फंगस रोग लगने से काला पड़ गया है फल
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में जापानी फल तेजी से सेब का विकल्प बनता जा रहा है लेकिन इस बार काला धब्बा रोग की चपेट में आने से रोगग्रस्त फलों के दाम औने-पौने मिल रहे हैं।
जिले में करीब 30 फीसदी फल रोग लगने के कारण काला पड़ गया है। फलों पर ब्लैक स्पॉट बनने से मंडियों में ऐसे फलों के दाम मात्र 15 से 20 रुपये किलो ही मिल रहे हैं। इस कारण उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है।
बताया जा रहा है कि इस बार अत्यधिक बारिश होने की वजह से बगीचों में फंगस पनपने से इस रोग प्रकोप बढ़ा है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक बारिश के कारण यह रोग लगा। हालांकि बागवानों ने दवा का छिड़काव भी किया है मगर इस रोग की वजह से काले धब्बे बनने से फल दागदार हो गया है।
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जापानी फल उत्पादक अनूप भंडारी, दलीप ठाकुर, विशाल ठाकुर, अनिश ठाकुर, मुनीश भंडारी और केवल कृष्ण ने कहा कि पहली बार जापानी फल रोग लगने से खराब हुआ है। इस कारण बागवानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि काला धब्बा रोग से बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सहनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ठाकुर बताते हैं कि अत्यधिक बारिश की वजह से फंगस पनपा है। कुछ कीटों ने भी फलों पर हमला किया है। इसके निजात के लिए कार्बेन्डाजिम और एंट्राकोल जैसी दवा का छिड़काव करना चाहिए। कीट के नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।
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इन किस्मों का हो रहा उत्पादन
प्रदेश में जापानी फल की फूयू, हेचिया, हयाक्यूम और कंडाघाट जैसी वैरायटी का उत्पादन हो रहा है। जापानी फल को 1000 से 1050 मीटर तक ऊंचाई पर आसानी से उगाया जा सकता है। इसे कम चिलिंग ऑवर्स की आवश्यकता होती है।
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जापानी में फंगस रोग लगने से काला पड़ गया है फल
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में जापानी फल तेजी से सेब का विकल्प बनता जा रहा है लेकिन इस बार काला धब्बा रोग की चपेट में आने से रोगग्रस्त फलों के दाम औने-पौने मिल रहे हैं।
जिले में करीब 30 फीसदी फल रोग लगने के कारण काला पड़ गया है। फलों पर ब्लैक स्पॉट बनने से मंडियों में ऐसे फलों के दाम मात्र 15 से 20 रुपये किलो ही मिल रहे हैं। इस कारण उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है।
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बताया जा रहा है कि इस बार अत्यधिक बारिश होने की वजह से बगीचों में फंगस पनपने से इस रोग प्रकोप बढ़ा है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक बारिश के कारण यह रोग लगा। हालांकि बागवानों ने दवा का छिड़काव भी किया है मगर इस रोग की वजह से काले धब्बे बनने से फल दागदार हो गया है।
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जापानी फल उत्पादक अनूप भंडारी, दलीप ठाकुर, विशाल ठाकुर, अनिश ठाकुर, मुनीश भंडारी और केवल कृष्ण ने कहा कि पहली बार जापानी फल रोग लगने से खराब हुआ है। इस कारण बागवानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि काला धब्बा रोग से बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सहनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ठाकुर बताते हैं कि अत्यधिक बारिश की वजह से फंगस पनपा है। कुछ कीटों ने भी फलों पर हमला किया है। इसके निजात के लिए कार्बेन्डाजिम और एंट्राकोल जैसी दवा का छिड़काव करना चाहिए। कीट के नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।
इन किस्मों का हो रहा उत्पादन
प्रदेश में जापानी फल की फूयू, हेचिया, हयाक्यूम और कंडाघाट जैसी वैरायटी का उत्पादन हो रहा है। जापानी फल को 1000 से 1050 मीटर तक ऊंचाई पर आसानी से उगाया जा सकता है। इसे कम चिलिंग ऑवर्स की आवश्यकता होती है।