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पार्वती घाटी में मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं
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कुल्लू। धार्मिक पर्यटन स्थल एवं विदेशी सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह रही पार्वती घाटी में मूलभूत सुविधाएं प्रदान होंगी। क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है।
उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि कसोल व मणिकर्ण क्षेत्रों में सैलानियों की सुविधा के लिए ढांचागत विकास और सृजन की आवश्यकता है। इसके लिए राशि का प्रावधान किया जाना जरूरी है। इसके मद्देनजर साडा की बैठक में समस्त सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि बाहरी प्रदेशों से आने वाले वाहनों से क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के सृजन के लिए साडा विकास शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क हिमाचल प्रदेश के वाहनों से नहीं वसूला जाएगा। शुल्क वसूली के लिए बैरियर स्थापित किया जाएगा और इसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया जा रहा है। उपायुक्त ने कहा कि पार्वती घाटी के कसोल व मणिकर्ण, खीरगंगा आदि जगहों पर हर साल भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। ये पर्यटक नदी-नालों के पास खाद्य वस्तुओं के पैकेट हर कहीं पर फेंक देते हैं, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को बड़ा खतरा हो रहा है। जगह-जगह पर कूड़ा-कचरा एकत्र होने के कारण क्षेत्र की सुंदरता पर भी दाग लग रहा है और साथ ही सैलानियों के अलावा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसान का कारण बन रहा है। कसोल व मणिकर्ण में ठोस तथा तरल कचरे के उपयुक्त निष्पादन की मांग उठ रही है। इसके लिए राशि जुटाना आवश्यक है। पार्वती घाटी के प्रमुख क्षेत्रों में कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी। साडा के पास नगरपालिका अधिनियम-1994 के अंतर्गत क्षेत्र विशेष के विकास के लिए विकास शुल्क लगाने की शक्तियां हैं और इसके तहत साडा विकास शुल्क लगाने का फैसला लिया गया है।
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उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि कसोल व मणिकर्ण क्षेत्रों में सैलानियों की सुविधा के लिए ढांचागत विकास और सृजन की आवश्यकता है। इसके लिए राशि का प्रावधान किया जाना जरूरी है। इसके मद्देनजर साडा की बैठक में समस्त सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि बाहरी प्रदेशों से आने वाले वाहनों से क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के सृजन के लिए साडा विकास शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क हिमाचल प्रदेश के वाहनों से नहीं वसूला जाएगा। शुल्क वसूली के लिए बैरियर स्थापित किया जाएगा और इसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया जा रहा है। उपायुक्त ने कहा कि पार्वती घाटी के कसोल व मणिकर्ण, खीरगंगा आदि जगहों पर हर साल भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। ये पर्यटक नदी-नालों के पास खाद्य वस्तुओं के पैकेट हर कहीं पर फेंक देते हैं, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को बड़ा खतरा हो रहा है। जगह-जगह पर कूड़ा-कचरा एकत्र होने के कारण क्षेत्र की सुंदरता पर भी दाग लग रहा है और साथ ही सैलानियों के अलावा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसान का कारण बन रहा है। कसोल व मणिकर्ण में ठोस तथा तरल कचरे के उपयुक्त निष्पादन की मांग उठ रही है। इसके लिए राशि जुटाना आवश्यक है। पार्वती घाटी के प्रमुख क्षेत्रों में कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी। साडा के पास नगरपालिका अधिनियम-1994 के अंतर्गत क्षेत्र विशेष के विकास के लिए विकास शुल्क लगाने की शक्तियां हैं और इसके तहत साडा विकास शुल्क लगाने का फैसला लिया गया है।
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