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साल 1880 से 1920 तक आजादी के लिए लड़ते रहे तिलक
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कुल्लू में नाट्य उत्सव के दौरान प्रस्तुती देते रंगकर्मी।
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। देश का हर नागरिक शिक्षित हो इसके लिए बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजी शासन के बावजूद कॉलेज की स्थापना की। उन्होंने पढ़े लिखे वर्ग में आजादी की आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से दो पत्रिकाएं मराठा और केसरी भी शुरू की। उन्हें बार-बार जेल भी जाना पड़ा।
रविवार को कुल्लू नाट्योत्सव में लोकमान्य तिलक नाटक का सफल मंचन किया गया। नाटक में स्वतंत्रता सेनानी तिलक की 1880 से लेकर 1920 तक के संग्राम को प्रतिबिंबित किया गया। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के कलाकारों ने रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर के निर्देशित इस नाटक में देश की आजादी के लिए तिलक के योगदान से दर्शकों को अवगत करवाया।
स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने आमजन से जुड़ने और उन तक राष्ट्रीयता का संदेश पहुंचाने के लिए गणपति महोत्सव, शिवाजी जयंति, लाठी और कुश्ती क्लबों का भी गठन किया। गर्म दल के नेता के रूप में वे कैसे और किन परिस्थितियों में उभरे, यह नाटक में परत दर परत दिखाया गया है। तिलक अपने अंत समय 1920 तक देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। नाटक में तिलक की भूमिका स्वयं केहर सिंह ठाकुर ने निभाई। जबकि मंच पर अन्य भूमिकाओं में आरती ठाकुर, रेवत राम विक्की, देस राज, श्याम लाल, सूरज, ममता, प्रेरणा, लक्ष्मी कश्यप, कल्पना और अनुरंजनी गौत्तम ने अभिनय किया। इस दौरान मीनाक्षी, वैभव, भरत सिंह, दिनेश, जीवानंद उपस्थित रहे।
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रविवार को कुल्लू नाट्योत्सव में लोकमान्य तिलक नाटक का सफल मंचन किया गया। नाटक में स्वतंत्रता सेनानी तिलक की 1880 से लेकर 1920 तक के संग्राम को प्रतिबिंबित किया गया। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के कलाकारों ने रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर के निर्देशित इस नाटक में देश की आजादी के लिए तिलक के योगदान से दर्शकों को अवगत करवाया।
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स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने आमजन से जुड़ने और उन तक राष्ट्रीयता का संदेश पहुंचाने के लिए गणपति महोत्सव, शिवाजी जयंति, लाठी और कुश्ती क्लबों का भी गठन किया। गर्म दल के नेता के रूप में वे कैसे और किन परिस्थितियों में उभरे, यह नाटक में परत दर परत दिखाया गया है। तिलक अपने अंत समय 1920 तक देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। नाटक में तिलक की भूमिका स्वयं केहर सिंह ठाकुर ने निभाई। जबकि मंच पर अन्य भूमिकाओं में आरती ठाकुर, रेवत राम विक्की, देस राज, श्याम लाल, सूरज, ममता, प्रेरणा, लक्ष्मी कश्यप, कल्पना और अनुरंजनी गौत्तम ने अभिनय किया। इस दौरान मीनाक्षी, वैभव, भरत सिंह, दिनेश, जीवानंद उपस्थित रहे।
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