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Kullu News: आशा वर्कर अब घर जाकर करेंगी शिशुओं की निगरानी
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सैंज (कुल्लू)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में आशा वर्करों को बच्चों की देखभाल करने का प्रशिक्षण दिया। पांच दिन तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में खंड चिकित्सा अधिकारी बंजार डॉ. सपना शर्मा, डॉ. वरुण और हेल्थ सुपरवाइजर राकेश शर्मा ने 15 माह तक बच्चों की देखभाल करने के लिए विभिन्न टिप्स दिए।
शनिवार को समापन के दिन आशा वर्करों को प्रशिक्षित कर फील्ड के लिए रवाना किया गया। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सपना शर्मा ने आशा वर्करों से कहा कि प्रशिक्षण शिविर में दी गई जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए बच्चों की गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम शुरू किया है। आशा वर्कर प्रसव के बाद माता का स्वास्थ्य, स्तनपान की आवश्यक देखभाल, बच्चों में बीमारी की देखभाल और बीमारियों के लक्षणों की पहचान 15 माह तक करेंगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में क्षेत्र की 39 आशा वर्करों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा प्रशिक्षण में गृह भ्रमण की योजना, स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई, बच्चों को दिया जाने वाला सही पोषण, ऊपरी आहार, टीकाकरण, बच्चे की वृद्धि की निगरानी और मासिक रिपोर्टिंग से अवगत करवाया। गृह भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, समुचित विकास और बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, निमोनिया और उनके कारण होने वाली मौतों से उनका बचाव करना है। संवाद
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शनिवार को समापन के दिन आशा वर्करों को प्रशिक्षित कर फील्ड के लिए रवाना किया गया। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सपना शर्मा ने आशा वर्करों से कहा कि प्रशिक्षण शिविर में दी गई जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए बच्चों की गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम शुरू किया है। आशा वर्कर प्रसव के बाद माता का स्वास्थ्य, स्तनपान की आवश्यक देखभाल, बच्चों में बीमारी की देखभाल और बीमारियों के लक्षणों की पहचान 15 माह तक करेंगी।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में क्षेत्र की 39 आशा वर्करों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा प्रशिक्षण में गृह भ्रमण की योजना, स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई, बच्चों को दिया जाने वाला सही पोषण, ऊपरी आहार, टीकाकरण, बच्चे की वृद्धि की निगरानी और मासिक रिपोर्टिंग से अवगत करवाया। गृह भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, समुचित विकास और बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, निमोनिया और उनके कारण होने वाली मौतों से उनका बचाव करना है। संवाद
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