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कुल्लू में बारदाना के वसूल रहे मनमाने दाम
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कुल्लू। जिले में सेब का सीजन शुरू हो चुका है। प्रतिदिन सेब की सैकड़ों पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहुंच रही हैं। लेकिन लकड़ी की जिन पेटियों (वारदाना) में सेब की पैकिंग हो रही है, उनके बागवानों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में सेब लकड़ी की पेटियों में भी पैक होकर जाता है। ऐसे में बाहर सेब भेजने वाले बागवानों को मजबूरी में महंगे दामों में वारदाना खरीदना पड़ रहा है।
पिछले साल लकड़ी की 20 किलो की पेटी 36 रुपये तक बिक रही थी। लेकिन इस बार इस पेटी को दुकानदार 40 रुपये, 45 रुपये और 50 रुपये में बेच रहे हैं। दुकानदार मनमर्जी से अपने-अपने दाम लगा रहे हैं। वारदाने का कोई निर्धारित दाम नहीं है। इसका खामियाजा घाटी के हजारों बागवानों को भुगतना पड़ रहा है। हैरानी की बात है कि एपीएमसी और जिला प्रशासन इसको लेकर मूकदर्शक बने हुए हैं। बागवानों के मुुताबिक सीजन से पहले ही वारदाना के दाम निर्धारित किए जाने चाहिए, जिससे बागवानों के साथ होने वाली मनमानी को रोका जा सके। जिला प्रशासन के साथ सोमवार को सीजन को लेकर हुई विभिन्न संगठनों की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुुखता से उठा है। भुंतर में आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष खुशाल ठाकुर ने कहा कि जिले में वारदाना के दाम तय नहीं किए गए हैं। कई बार बागवानों ने जिला प्रशासन और एपीएमसी के अधिकारियों के ध्यान में इस मसले को लाया है। इसके बावजूद अभी तक वारदाना बेचने वाले दुकानदारों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग सका है। बागवानों से मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। उधर, इस संबंध में उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि इसके लिए जल्द ही नीति बनाई जाएगी। वारदाना के दाम जल्द ही निर्धारित किए जाएंगे।
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पिछले साल लकड़ी की 20 किलो की पेटी 36 रुपये तक बिक रही थी। लेकिन इस बार इस पेटी को दुकानदार 40 रुपये, 45 रुपये और 50 रुपये में बेच रहे हैं। दुकानदार मनमर्जी से अपने-अपने दाम लगा रहे हैं। वारदाने का कोई निर्धारित दाम नहीं है। इसका खामियाजा घाटी के हजारों बागवानों को भुगतना पड़ रहा है। हैरानी की बात है कि एपीएमसी और जिला प्रशासन इसको लेकर मूकदर्शक बने हुए हैं। बागवानों के मुुताबिक सीजन से पहले ही वारदाना के दाम निर्धारित किए जाने चाहिए, जिससे बागवानों के साथ होने वाली मनमानी को रोका जा सके। जिला प्रशासन के साथ सोमवार को सीजन को लेकर हुई विभिन्न संगठनों की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुुखता से उठा है। भुंतर में आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष खुशाल ठाकुर ने कहा कि जिले में वारदाना के दाम तय नहीं किए गए हैं। कई बार बागवानों ने जिला प्रशासन और एपीएमसी के अधिकारियों के ध्यान में इस मसले को लाया है। इसके बावजूद अभी तक वारदाना बेचने वाले दुकानदारों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग सका है। बागवानों से मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। उधर, इस संबंध में उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि इसके लिए जल्द ही नीति बनाई जाएगी। वारदाना के दाम जल्द ही निर्धारित किए जाएंगे।
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