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Kullu News: जीआई टैग मिलने से सीबकथोर्न प्रोजेक्टों को मंजूरी मिलने की उम्मीद
Sat, 04 Jul 2026 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:34 PM IST
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मुख्यमंत्री, प्रधान मुख्य अरण्यपाल को फिर पत्र सौंपेगी एसोसिएशन
2021 में प्रदेश सरकार को दिए हैं प्रोजेक्ट 109.5 करोड़ रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीबकथोर्न (छरमा) को जीआई टैग मिल गया है। इससे लाहौल-स्पीति के लोगों के साथ इस पर काम करने में संस्था और भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन में खुशी जताई है।
लाहौल-स्पीति में सीबकथोर्न को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार को दो प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं जो चार से पांच सालों से लटके हैं। लेकिन अब जीआई टैग मिलने से सीबकथोर्न एसोसिएशन ऑफ इडिया को लंबित पड़े प्रोजेक्टों को मंजूरी मिलने की उम्मीद बंध गई है।
भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन ने कैंपा के तहत सीबकथोर्न के लिए 104 करोड़ रुपये का प्रपोजल दिया है। इसमें लाहौल-स्पीति जिला के वन क्षेत्र में छरमा को लगाया जाना है। इससे जंगल, पर्यावरण, प्रकृति का संरक्षण होगा। कैंपा करीब 1,000 करोड़ रूपये का प्रोजेक्ट है, बावजूद सरकार व वन विभाग ने मंजूरी नहीं दी।
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इसके अलावा चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर द्वारा ने भी 2021 को जाइका के निदेशक को 5.5 करोड़ रुपये को प्रोजेक्ट बना कर जमा किया है। इसमें लाहौल-स्पीति जिला की करीब 5,000 हेक्टेयर घासनी में सीबकथोर्न लगाया जाएगा।
भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि लाहौल-स्पीति जिला छरमा के लिए अनुकूल है। इन प्रोजेक्टाें के धरातल पर उतरने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजित होंगे। वहीं घाटी के पर्यावरण संरक्षण और आजीविका सुधार के लिए सीबकथॉर्न ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि देश की कंपनियों में तैयार किए गए सीबकथोर्न के उत्पादों के लिए करीब 2,000 टन सीबकथोर्न की जरूरत है। देश में कम उत्पादन होने से कंपनियां चीन के आयात करने को मजबूर है।
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2021 में प्रदेश सरकार को दिए हैं प्रोजेक्ट 109.5 करोड़ रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीबकथोर्न (छरमा) को जीआई टैग मिल गया है। इससे लाहौल-स्पीति के लोगों के साथ इस पर काम करने में संस्था और भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन में खुशी जताई है।
लाहौल-स्पीति में सीबकथोर्न को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार को दो प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं जो चार से पांच सालों से लटके हैं। लेकिन अब जीआई टैग मिलने से सीबकथोर्न एसोसिएशन ऑफ इडिया को लंबित पड़े प्रोजेक्टों को मंजूरी मिलने की उम्मीद बंध गई है।
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भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन ने कैंपा के तहत सीबकथोर्न के लिए 104 करोड़ रुपये का प्रपोजल दिया है। इसमें लाहौल-स्पीति जिला के वन क्षेत्र में छरमा को लगाया जाना है। इससे जंगल, पर्यावरण, प्रकृति का संरक्षण होगा। कैंपा करीब 1,000 करोड़ रूपये का प्रोजेक्ट है, बावजूद सरकार व वन विभाग ने मंजूरी नहीं दी।
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इसके अलावा चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर द्वारा ने भी 2021 को जाइका के निदेशक को 5.5 करोड़ रुपये को प्रोजेक्ट बना कर जमा किया है। इसमें लाहौल-स्पीति जिला की करीब 5,000 हेक्टेयर घासनी में सीबकथोर्न लगाया जाएगा।
भारतीय सीबकथोर्न एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि लाहौल-स्पीति जिला छरमा के लिए अनुकूल है। इन प्रोजेक्टाें के धरातल पर उतरने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजित होंगे। वहीं घाटी के पर्यावरण संरक्षण और आजीविका सुधार के लिए सीबकथॉर्न ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि देश की कंपनियों में तैयार किए गए सीबकथोर्न के उत्पादों के लिए करीब 2,000 टन सीबकथोर्न की जरूरत है। देश में कम उत्पादन होने से कंपनियां चीन के आयात करने को मजबूर है।