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कश्मीरी सेब आने से गिरे 1000 रुपये तक गिरे दाम
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मनाली (कुल्लू)। जिला कुल्लू में सेब का सीजन आधे से अधिक सिमट गया है। ऐसे में बागवानों को धीरे-धीरे सेब के रेट कम मिल रहे हैं। कश्मीरी सेब आने से कुल्लू के सेब के दामों में एक हजार रुपये तक गिरावट आई है। इससे जिले के बागवानों की चिंता बढ़ गई है। एक सप्ताह पहले दिल्ली में कार्टन का रेट 2000 से 2200 रुपये था।
कुल्लू का सेब अब 1100 से 1200 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है। इससे जिले के ऊंचाई वाले इलाकों के बागवानों को कोरोना काल में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में बचे 20 फीसदी सेब का तुड़ान इन दिनों जोरों पर है। बागवान पूर्ण चंद, दुनी सिंह, प्रताप, राजेश तथा नोक सिंह ने कहा कि दिल्ली में एक दम से कार्टन के रेट में कमी आई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मंडियों में भी सेब के दाम 50 रुपये प्रति किलो से नीचे 40 तक आ पहुंचे हैं। ऐसे में बागवान अपने उत्पाद को लेकर परेशान हैं। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान प्रेम शर्मा ने चिंता जताई है। कहा कि कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब तोड़ना शुरू ही हुआ है और दाम कुछ दिनों में बुरी तरह गिर गया है। इससे बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द मध्यस्थता कर बागवानों को राहत प्रदान करें। कहा कि जिले में अभी 20 प्रतिशत सेब है। एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि किन्नौर व कश्मीर का सेब आने से दिल्ली से लेकर लोकल मंडियों में सेब के दामों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी सेब के रेट में उछाल आने की संभावना कम है।
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कुल्लू का सेब अब 1100 से 1200 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है। इससे जिले के ऊंचाई वाले इलाकों के बागवानों को कोरोना काल में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में बचे 20 फीसदी सेब का तुड़ान इन दिनों जोरों पर है। बागवान पूर्ण चंद, दुनी सिंह, प्रताप, राजेश तथा नोक सिंह ने कहा कि दिल्ली में एक दम से कार्टन के रेट में कमी आई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मंडियों में भी सेब के दाम 50 रुपये प्रति किलो से नीचे 40 तक आ पहुंचे हैं। ऐसे में बागवान अपने उत्पाद को लेकर परेशान हैं। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान प्रेम शर्मा ने चिंता जताई है। कहा कि कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब तोड़ना शुरू ही हुआ है और दाम कुछ दिनों में बुरी तरह गिर गया है। इससे बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द मध्यस्थता कर बागवानों को राहत प्रदान करें। कहा कि जिले में अभी 20 प्रतिशत सेब है। एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि किन्नौर व कश्मीर का सेब आने से दिल्ली से लेकर लोकल मंडियों में सेब के दामों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी सेब के रेट में उछाल आने की संभावना कम है।
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