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वानस्पतिक वृद्धि, बीमों के विकास का सही संतुलन जरूरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू/खराहल। बड़े पौधों की प्रूनिंग में बागवानों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बगीचों में जिन पौधों की आयु 10 से 25 वर्ष के बीच है, उनकी प्रूनिंग इस प्रकार हो कि उन पर आरी का प्रयोग न करना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पौधों में वानस्पतिक वृद्धि और बीमों के विकास का सही संतुलन बनाना जरूरी है।
प्रूनिंग के समय पौधे की आयु और आकार का ध्यान रखना चाहिए। 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के पौधों में रोशनी सुधार और पुराने बीमों की छांट करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो शाखाएं और उपशाखाएं 1-2 फीट की ऊंचाई पर एक ही दिशा में समानांतर चल रही हो, उनमें एक को निकाल दें। बीमों की छंटाई पर विशेष ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है, जो बीमा 6-7 वर्ष पुराना हो उसे एक आंख छोड़कर काट दें। नीचे की ओर लटक रहे बीमों की कटाई करें। घने बीमों की छंटाई करने से फलों की गुणवत्ता बनी रहेगी। घाटी के बागवान अमित, रोशन लाल, जयचंद, सुशील ठाकुर, चमन ठाकुर, महेश शर्मा, गोपाल ठाकुर, चुनी लाल और मोहर सिंह आदि का कहना है कि वे अपने बगीचों में विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक काट-छांट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य रॉयल और स्पर वैरायटी में काट-छांट अलग-अलग तरीके से की जाती है।
समय पर पेस्ट न लगाने से लगता है रोग
उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर कहते हैं कि बडे़ पौधों में वानस्पतिक वृद्धि और बीमों के विकास का सही संतुलन बनाना जरूरी है। पौधों की आयु और आकार को ध्यान में रख कर काट-छांट को करना चाहिए। काट-छांट के बाद चौबटिया पेस्ट लगाना लाजिमी है। जख्म में समय पर पेस्ट न लगाने से पौधा कैंकर रोग की चपेट में आ सकता है।
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कुल्लू/खराहल। बड़े पौधों की प्रूनिंग में बागवानों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बगीचों में जिन पौधों की आयु 10 से 25 वर्ष के बीच है, उनकी प्रूनिंग इस प्रकार हो कि उन पर आरी का प्रयोग न करना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पौधों में वानस्पतिक वृद्धि और बीमों के विकास का सही संतुलन बनाना जरूरी है।
प्रूनिंग के समय पौधे की आयु और आकार का ध्यान रखना चाहिए। 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के पौधों में रोशनी सुधार और पुराने बीमों की छांट करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो शाखाएं और उपशाखाएं 1-2 फीट की ऊंचाई पर एक ही दिशा में समानांतर चल रही हो, उनमें एक को निकाल दें। बीमों की छंटाई पर विशेष ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है, जो बीमा 6-7 वर्ष पुराना हो उसे एक आंख छोड़कर काट दें। नीचे की ओर लटक रहे बीमों की कटाई करें। घने बीमों की छंटाई करने से फलों की गुणवत्ता बनी रहेगी। घाटी के बागवान अमित, रोशन लाल, जयचंद, सुशील ठाकुर, चमन ठाकुर, महेश शर्मा, गोपाल ठाकुर, चुनी लाल और मोहर सिंह आदि का कहना है कि वे अपने बगीचों में विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक काट-छांट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य रॉयल और स्पर वैरायटी में काट-छांट अलग-अलग तरीके से की जाती है।
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समय पर पेस्ट न लगाने से लगता है रोग
उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर कहते हैं कि बडे़ पौधों में वानस्पतिक वृद्धि और बीमों के विकास का सही संतुलन बनाना जरूरी है। पौधों की आयु और आकार को ध्यान में रख कर काट-छांट को करना चाहिए। काट-छांट के बाद चौबटिया पेस्ट लगाना लाजिमी है। जख्म में समय पर पेस्ट न लगाने से पौधा कैंकर रोग की चपेट में आ सकता है।
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