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Kullu News: बारिश से सेब का नहीं बन पा रहा आकार
Thu, 27 Jul 2023 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 27 Jul 2023 11:06 PM IST
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कुल्लू। बागवानी के लिए प्रसिद्ध कुल्लू घाटी के सेब उत्पादकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले सेब की फ्लावरिंग और सेटिंग के समय असमय बर्फबारी-बारिश से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा, अब फसल तैयार होने पर लगातार बारिश सेब के आकार के लिए मुसीबत बन गई है।
इससे सेब की लालगी और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। बागवानों का कहना कि सेब के लिए इन दिनों धूप की जरूरत अधिक है, मगर रोज हो रही बारिश से सेब के बगीचों को उचित मात्रा में धूप नहीं मिल रही है। जिले में करीब 30,000 हेक्टेयर में बागवानी की जाती है। इसमें सेब का दायरा सबसे अधिक लगभग 25,000 हेक्टेयर है। जिले में सेब का कारोबार लगभग 1,000 करोड़ का है। 90 फीसदी परिवार बागवानी से जुड़े हैं।
बागवान लीला प्रसाद, तेज राम, जगदीश ठाकुर, लाल चंद ठाकुर, दलीप सिंह तथा मोहन लाल ने कहा कि मार्च से लेकर अब तक मौसम की मार बागवानों पर पड़ी है।
शुरू में असमय बर्फबारी और बारिश के कारण फ्लावरिंग और सेटिंग पर खासा असर पड़ा। अप्रैल-मई में ओलावृष्टि ने भी सेब को भारी नुकसान पहुंचाया। अब सेब का न तो उचित आकार बन रहा और न ही सेब में रंग और गुणवत्ता नजर आ रही है। कम उत्पादन और अब आकार, रंग न आने से बागवानों को बेहतर दाम नहीं मिल पाएंगे। कहा कि जिले में 15 अगस्त के बाद सेब का सीजन जोरों पर चलेगा। अभी अगर मौसम साथ देता है तो बागवानों का नुकसान कम होगा।
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बागवानी विशेषज्ञ किशोरी लाल कटोच ने कहा कि ठंड के कारण सेब के साइज के साथ रंग पर भी असर पड़ता है। इस साल मौसम लगातार बरस रहा है और बागवानीे को बहुत नुकसान हुआ है।
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अब तक 34 करोड़ का नुकसान
कुल्लू में सेब का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है लेकिन मार्च से लेकर 27 जुलाई तक सेब का करीब 34 करोड़ का नुकसान आंका गया है। बागवानी विभाग ने शुरुआती दौर में 70 लाख पेटियों का लक्ष्य रखा था।
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इससे सेब की लालगी और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। बागवानों का कहना कि सेब के लिए इन दिनों धूप की जरूरत अधिक है, मगर रोज हो रही बारिश से सेब के बगीचों को उचित मात्रा में धूप नहीं मिल रही है। जिले में करीब 30,000 हेक्टेयर में बागवानी की जाती है। इसमें सेब का दायरा सबसे अधिक लगभग 25,000 हेक्टेयर है। जिले में सेब का कारोबार लगभग 1,000 करोड़ का है। 90 फीसदी परिवार बागवानी से जुड़े हैं।
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बागवान लीला प्रसाद, तेज राम, जगदीश ठाकुर, लाल चंद ठाकुर, दलीप सिंह तथा मोहन लाल ने कहा कि मार्च से लेकर अब तक मौसम की मार बागवानों पर पड़ी है।
शुरू में असमय बर्फबारी और बारिश के कारण फ्लावरिंग और सेटिंग पर खासा असर पड़ा। अप्रैल-मई में ओलावृष्टि ने भी सेब को भारी नुकसान पहुंचाया। अब सेब का न तो उचित आकार बन रहा और न ही सेब में रंग और गुणवत्ता नजर आ रही है। कम उत्पादन और अब आकार, रंग न आने से बागवानों को बेहतर दाम नहीं मिल पाएंगे। कहा कि जिले में 15 अगस्त के बाद सेब का सीजन जोरों पर चलेगा। अभी अगर मौसम साथ देता है तो बागवानों का नुकसान कम होगा।
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बागवानी विशेषज्ञ किशोरी लाल कटोच ने कहा कि ठंड के कारण सेब के साइज के साथ रंग पर भी असर पड़ता है। इस साल मौसम लगातार बरस रहा है और बागवानीे को बहुत नुकसान हुआ है।
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अब तक 34 करोड़ का नुकसान
कुल्लू में सेब का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है लेकिन मार्च से लेकर 27 जुलाई तक सेब का करीब 34 करोड़ का नुकसान आंका गया है। बागवानी विभाग ने शुरुआती दौर में 70 लाख पेटियों का लक्ष्य रखा था।