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टैक्स से बचने के लिए कैश मेमो पर सेब की खरीद-फरोख्त

Fri, 09 Aug 2019 10:00 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Aug 2019 10:00 PM IST
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agriculture
कुल्लू जरौला में सेब का सीजन के दौरान पैकिंग करते बागवान। - फोटो : Kullu
कुल्लू/खराहल। जिले की मंडियों में आर फार्म पर न होकर कैश मेमो पर ही सेब की खरीद-फरोख्त हो रही है। ऐसे में कैश मेमो पर रोज लाखों रुपये की चपत लग रही है। साथ ही बागवानों को रेट का सही आकलन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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आर फार्म पर कृषि उत्पाद बेचने का प्रूफ रहता है, जिससे उन्हें आयकर और बैंक सहित कई सहूलियत मिल जाती है। लेकिन अधिकतर आढ़ती टैक्स से बचने के लिए अपने कैश मेमो पर ही लेन-देन का भुगतान कर रहे हैं। एपीएमसी एक्ट 2005 में बागवानों को पक्का पर्चा दिया जाना जरूरी है। लेकिन यहां सब्जी मंडियों में सरकारी नियमों की सरेआम ही धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि मामले से संबंधित विभाग भी अवगत है। लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इसको लेकर घाटी के बागवानों व किसानों में सरकार व विभाग के प्रति नाराजगी है। घाटी के बागवान अमित, चमन, राज, श्याम, कमल, अमन, राम चंद आदि का कहना है कि किसानों और बागवानों को अधिकतर आढ़ती कैश मेमो पर ही भुगतान करते हैं। कहा कि इस बारे में उनको अधिक जानकारी भी नहीं है। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन ठाकुर कहते है कि नियमानुसार ही बागवानों को भुगतान किया जा रहा है। कहा कि बागवानों के हित का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया का कहना है कि इस तरह मामला है तो सामने आने पर नियम के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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क्या है आर और क्यू फार्म
आर फार्म के तहत बेचे गए उत्पाद सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाते हैं। इससे किसानों-बागवानों को बैंक में लेन-देन में भी सुविधा होती है। अगर आढ़ती या बिचौलिया लेन-देन में धोखा करता है तो इसका रिकॉर्ड बोर्ड के पास अंकित होता है। व्यापारियों का सारा लेखा-जोखा क्यू फार्म में विस्तार से लिखा होता है। इसके तहत ही बोर्ड को शुल्क अदा करना पड़ता है। लिहाजा इस फार्म के तहत ही भुगतान करना लाजिमी है।
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