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Kullu News: पूजा-पाठ के बाद छम नृत्य से खूब बांधा समां
Thu, 22 May 2025 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 22 May 2025 10:46 PM IST
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लाहौल के तुपचिलिंग बौद्ध मठ में मुखौटा नृत्य करते बौद्ध भिक्षु।-संवाद
तुपचिलिंग बौद्ध मठ में हुआ आयोजन, जांस्कर से लाहौल पहुंचे बौद्ध भिक्षु
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। चंद्राभागा संगम के ठीक ऊपर स्थित तुपचिलिंग बौद्ध मठ में वार्षिक विशेष पूजा-पाठ के साथ छम (मुखौटा) नृत्य का आयोजन किया गया। काफी संख्या में लोग मठ पहुंचे। इनमें महिलाएं ज्यादा थीं।
छम नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन के माध्यम से बौद्ध धर्म और संस्कृति की समृद्धि और विविधता का प्रदर्शन किया गया। मठ के पुजारियों, कारदारों और स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लिया। परंपरागत तरीके से पूजा-पाठ और नृत्य का किया। लोगों ने मठ में आकर आशीर्वाद लिया। पूजा-पाठ और छम नृत्य के लिए बौद्ध भिक्षु लद्दाख के जांस्कर से लाहौल पहुंचे। जांस्कर की महिलाओं ने पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
मठ के पूर्व कारदार सुरेश कुमार ने बताया कि मठ में वार्षिक विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया गया। छम नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया। धार्मिक आयोजन में काफी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। बताया कि इस आयोजन के माध्यम से बौद्ध धर्म और संस्कृति की समृद्धि और विविधता का प्रदर्शन किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। चंद्राभागा संगम के ठीक ऊपर स्थित तुपचिलिंग बौद्ध मठ में वार्षिक विशेष पूजा-पाठ के साथ छम (मुखौटा) नृत्य का आयोजन किया गया। काफी संख्या में लोग मठ पहुंचे। इनमें महिलाएं ज्यादा थीं।
छम नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन के माध्यम से बौद्ध धर्म और संस्कृति की समृद्धि और विविधता का प्रदर्शन किया गया। मठ के पुजारियों, कारदारों और स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लिया। परंपरागत तरीके से पूजा-पाठ और नृत्य का किया। लोगों ने मठ में आकर आशीर्वाद लिया। पूजा-पाठ और छम नृत्य के लिए बौद्ध भिक्षु लद्दाख के जांस्कर से लाहौल पहुंचे। जांस्कर की महिलाओं ने पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
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मठ के पूर्व कारदार सुरेश कुमार ने बताया कि मठ में वार्षिक विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया गया। छम नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया। धार्मिक आयोजन में काफी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। बताया कि इस आयोजन के माध्यम से बौद्ध धर्म और संस्कृति की समृद्धि और विविधता का प्रदर्शन किया गया।
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