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Kullu News: सेब के बाद अब जापानी फल करेगा मालामाल
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अगले महीने शुरू होगा सीजन, बागवानों को बेहतर मिलते है दामइस बार फसल भी अच्छी, बगीचों में आकर व्यापारी करते हैं सौदा
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सेब और अनार के बाद जिले में अक्तूबर में जापानी फल का सीजन शुरू हो जाएगा। इस बार जापानी फल की अच्छी फसल है। बागवानी के क्षेत्र में आई विविधता के चलते अब कुल्लू जिले का बागवान सेब, नाशपाती, प्लम और अनार पर ही निर्भर नहीं रहा। पारंपरिक फसलों के साथ विदेशी तकनीक और बहुमुखी बागवानी अपनाई जा रही है।
बीते पांच वर्षों से जापानी फल कुल्लू के बागवानों को मालामाल करने लगा है। जापानी फल के मार्केट में अच्छे दाम मिलते हैं। जिले में सेब सीजन अब अंतिम चरण में चल रहा है। सेब के बाद जापानी फल का तुड़ान शुरू हो जाएगा। बागवानों को इस बार भी बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। पिछले साल जापानी फल 60 से 70 रुपये प्रति किलो मंडियों में बिका था। कुल्लू जिले में सेब उत्पादन की तुलना में मात्र 1.5 फीसदी भूमि पर जापानी फल का उत्पादन हो रहा है।
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि कुछ सालों से इसका उत्पादन और क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। बाहरी मंडियों में जापानी फल की अच्छी मांग है और दाम भी बेहतर मिलते हैं। जापानी फल की फयू और हेचिया प्रजाति का उत्पादन हो रहा है। जिले के गड़सा, हुरला, थरास, भुंतर, खराहल, बंजार, सैंज आदि क्षेत्रों में जापानी फल के बगीचे तैयार हो रहे हैं। बागवान मधुसूदन शर्मा, अशोक, निमत राम, विकास, रामदेव, कमल, बली राम और कृष्ण ने कहा कि बीते चार सालों से उन्हें जापानी फल के अच्छे दाम मिल रहे हैं। मांग इतनी ज्यादा है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी के कई व्यापारी बगीचों में आकर सौदा करते हैं।
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कुल्लू में बागवान जापानी फल को काफी तरजीह दे रहे हैं। इसकी शेल्फ लाइफ अन्य फलों की तुलना में ज्यादा है। विभाग लोगों को जापानी फल की बागवानी के लिए प्रेरित कर रहा है। जापानी फल कम खर्च में ज्यादा लाभ देने वाली फसल है।
-डाॅ. नीना ठाकुर, उप निदेशक, बागवानी विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सेब और अनार के बाद जिले में अक्तूबर में जापानी फल का सीजन शुरू हो जाएगा। इस बार जापानी फल की अच्छी फसल है। बागवानी के क्षेत्र में आई विविधता के चलते अब कुल्लू जिले का बागवान सेब, नाशपाती, प्लम और अनार पर ही निर्भर नहीं रहा। पारंपरिक फसलों के साथ विदेशी तकनीक और बहुमुखी बागवानी अपनाई जा रही है।
बीते पांच वर्षों से जापानी फल कुल्लू के बागवानों को मालामाल करने लगा है। जापानी फल के मार्केट में अच्छे दाम मिलते हैं। जिले में सेब सीजन अब अंतिम चरण में चल रहा है। सेब के बाद जापानी फल का तुड़ान शुरू हो जाएगा। बागवानों को इस बार भी बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। पिछले साल जापानी फल 60 से 70 रुपये प्रति किलो मंडियों में बिका था। कुल्लू जिले में सेब उत्पादन की तुलना में मात्र 1.5 फीसदी भूमि पर जापानी फल का उत्पादन हो रहा है।
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विभागीय अधिकारी बताते हैं कि कुछ सालों से इसका उत्पादन और क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। बाहरी मंडियों में जापानी फल की अच्छी मांग है और दाम भी बेहतर मिलते हैं। जापानी फल की फयू और हेचिया प्रजाति का उत्पादन हो रहा है। जिले के गड़सा, हुरला, थरास, भुंतर, खराहल, बंजार, सैंज आदि क्षेत्रों में जापानी फल के बगीचे तैयार हो रहे हैं। बागवान मधुसूदन शर्मा, अशोक, निमत राम, विकास, रामदेव, कमल, बली राम और कृष्ण ने कहा कि बीते चार सालों से उन्हें जापानी फल के अच्छे दाम मिल रहे हैं। मांग इतनी ज्यादा है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी के कई व्यापारी बगीचों में आकर सौदा करते हैं।
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कुल्लू में बागवान जापानी फल को काफी तरजीह दे रहे हैं। इसकी शेल्फ लाइफ अन्य फलों की तुलना में ज्यादा है। विभाग लोगों को जापानी फल की बागवानी के लिए प्रेरित कर रहा है। जापानी फल कम खर्च में ज्यादा लाभ देने वाली फसल है।
-डाॅ. नीना ठाकुर, उप निदेशक, बागवानी विभाग