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Kullu News: नींद में प्रशासन... सड़कें ओढ़ रहीं गोवंश का दर्द

Sun, 18 Jan 2026 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Sun, 18 Jan 2026 11:07 PM IST
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Administration in slumber... roads are bearing the pain of cattle
कुल्लू के गौसदन में बेसहारा पशु।-संवाद
हाड कंपा देने वाली ठंड के बीच सैंज घाटी की सड़कों पर ठिठुर रहे सैकड़ों मवेशी
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धरातल पर नहीं उतर पाईं बेसहारा पशुओं को ठिकाना दिलाने की योजनाएं
जिले में कागजों तक सीमित नजर आ रहे गो-संरक्षण के दावे और योजनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। कड़ाके की ठंड के बीच सैंज घाटी में सैकड़ों बेसहारा गोवंश सड़कों पर खुले आसमान के नीचे ठिठुरने को मजबूर हैं।
शून्य से नीचे गिरते तापमान और खेतों में फसल न होने से पशु भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। गो-संरक्षण के दावे और योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। हर गुजरता दिन प्रशासनिक उदासीनता और व्यवस्था की कमी को उजागर कर रहा है। बेसहारा पशुओं को आशियाना दिलाने की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। गोसंरक्षण के दावे भी खोखले नजर आ रहे हैं। सैंज घाटी की बात करें तो सड़कों पर बेसहारा पशुओं की भरमार है। न्यूली, सियूंड, सैंज, शलवाड़, लारजी, रैला, देहरी, शांघड़ और शैंशर हर जगह बेसहारा पशु खुले आसमान के नीचे हैं।
गौर रहे कि इन दिनों पाला जमने से तापमान शून्य से नीचे गिर रहा है। कड़ाके की सर्दी गोवंश की परीक्षा ले रही है। इन दिनों खेतों में फसलें भी लगभग निकल चुकी हैं। ऐसे में बेसहारा पशु अपना पेट भरने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में करीब 32 हजार लावारिस पशु हैं। इनमें सिर्फ 12 हजार गायों को गोसदनों में रखकर पुनर्वास किया गया है। कुल्लू जिले में गो संरक्षण सामाजिक संस्थाओं के भरोसे चल रहा है। जिले में गोसदनों पर वर्ष 2017 से अब तक 23.65 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद बेसहारा पशुओं की समस्या होता दिखाई नहीं दे रहा है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को ठंड के मौसम में बेसहारा घूम रहे मवेशियों के लिए उचित प्रबंध करने को कहा है।
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देवी-देवता गो संरक्षण का दे चुके हैं आदेश
वर्ष 2025 में नग्गर में देव संसद (जगती) में देवी-देवताओं ने गो संरक्षण के आदेश दिए थे। देवी-देवताओं ने गूर के माध्यम से देववाणी में गोमाता को सड़कों पर न छोड़ने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम नहीं हुई है।
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