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Kullu News: जंगलों में ही नहीं, सेब बगीचों में भी गुच्छी की भरमार
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दाम कम मिलने से ग्रामीणों में मायूसी
दिनभर गुच्छी की तलाश कर रहे ग्रामीण
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जिले के जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी की इस बार बंपर पैदावार हुई है। लोगों को गुच्छी जंगलों के साथ सेब के बगीचों में भी बड़े पैमाने पर मिल रही है। ग्रामीण इलाकों में सुबह से लेकर शाम तक लोग गुच्छी की तलाश कर रहे हैं। लोगों को किल्टे के हिसाब से गुच्छी मिल रही है लेकिन दाम कम होने से लोगों में मायूसी है। व्यापारी लोगों से 4,000 से 7,000 रुपये किलो के हिसाब से गुच्छी खरीद रहे हैं।
मार्च से मौसम में आए परिवर्तन से ग्रामीणों के चेहरे खिल गए हैं। जिले में कई वर्षों के बाद जंगलों में गुच्छी की बंपर पैदावार हुई है। मार्च के तीसरे सप्ताह से लेकर मई में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी ग्रामीण इलाकों की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाती है। कुल्लू में हर वर्ष करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की गुच्छी का कारोबार होता है। इस बार लोगों को गुच्छी भारी मात्रा में मिल रही है। कई लोग बैग में तो को कई किल्टे में गुच्छी ढूंढ कर ला रहे हैं। आनी, निरमंड, बंजार, तीर्थन, बठाहड़, गड़सा, मणिकर्ण, खराहल, लगवैली सहित ऊझी घाटी में लोगों को किलो के हिसाब से गुच्छी मिल रही है। जबकि पहले पहले यह गुच्छी दिनभर तलाश करने पर 100 से 200 ग्राम तक ही मिल पाती थी।
ग्रामीणों तारा देवी, किशोरी लाल, झाबे राम और प्रीतम सिंह ने बताया कि वह मार्च से मई तक गुच्छी की तलाश जंगलों में करते हैं। सचाणी पंचायत के क्षादी गांव की तारा देवी ने कहा कि वह जंगल से पूरा किल्टा गुच्छी ढूंढ कर लाई हैं, जिसमें करीब 10 किलो गुच्छी है। वहीं महेंद्र ठाकुर ने कहा कि वह सेब बगीचा देखने गए तो उन्हें एक ही जगह करीब एक किलो गुच्छी मिली है। सचाणी पंचायत के प्रधान योगराज ने कहा कि उनके क्षेत्र में 7,000 रुपये प्रति किलो गुच्छी खरीदी जा रही है।
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गुच्छी को अभी 4,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लिया जा रहा है। 15 मई के बाद इसके दाम में उछाल आ सकता है। इस बार जंगल में लोगों को भारी मात्रा में गुच्छी मिल रही है। इससे कीमत में कमी आई है। कहा कि पिछले कुछ साल पहले उन्होंने गुच्छी को 10,000 से 12,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी खरीदा है।
.............अतुल शर्मा गुच्छी व्यापारी गुशैणी बंजार
गुच्छी के लिए तापमान 17 डिग्री से नीचे चाहिए और इन दिनों गुच्छी के लिए मौसम अनुकूल चल रहा है। इसकी उपज 1,500 से 3,500 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन के अलावा विटामिन बी और डी की मात्रा है। इसके सेवन से दिल की बीमारियां दूर होती हैं और बीमारियों की लड़ने की क्षमता होती है। वहीं गुच्छी का नियमित सेवन से रक्तचाप को भी कंट्रोल करने में मदद करती है। -डा आरके सिंह प्रभारी जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास अनुसंधान संस्थान कुल्लू।
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दिनभर गुच्छी की तलाश कर रहे ग्रामीण
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जिले के जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी की इस बार बंपर पैदावार हुई है। लोगों को गुच्छी जंगलों के साथ सेब के बगीचों में भी बड़े पैमाने पर मिल रही है। ग्रामीण इलाकों में सुबह से लेकर शाम तक लोग गुच्छी की तलाश कर रहे हैं। लोगों को किल्टे के हिसाब से गुच्छी मिल रही है लेकिन दाम कम होने से लोगों में मायूसी है। व्यापारी लोगों से 4,000 से 7,000 रुपये किलो के हिसाब से गुच्छी खरीद रहे हैं।
मार्च से मौसम में आए परिवर्तन से ग्रामीणों के चेहरे खिल गए हैं। जिले में कई वर्षों के बाद जंगलों में गुच्छी की बंपर पैदावार हुई है। मार्च के तीसरे सप्ताह से लेकर मई में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी ग्रामीण इलाकों की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाती है। कुल्लू में हर वर्ष करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की गुच्छी का कारोबार होता है। इस बार लोगों को गुच्छी भारी मात्रा में मिल रही है। कई लोग बैग में तो को कई किल्टे में गुच्छी ढूंढ कर ला रहे हैं। आनी, निरमंड, बंजार, तीर्थन, बठाहड़, गड़सा, मणिकर्ण, खराहल, लगवैली सहित ऊझी घाटी में लोगों को किलो के हिसाब से गुच्छी मिल रही है। जबकि पहले पहले यह गुच्छी दिनभर तलाश करने पर 100 से 200 ग्राम तक ही मिल पाती थी।
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ग्रामीणों तारा देवी, किशोरी लाल, झाबे राम और प्रीतम सिंह ने बताया कि वह मार्च से मई तक गुच्छी की तलाश जंगलों में करते हैं। सचाणी पंचायत के क्षादी गांव की तारा देवी ने कहा कि वह जंगल से पूरा किल्टा गुच्छी ढूंढ कर लाई हैं, जिसमें करीब 10 किलो गुच्छी है। वहीं महेंद्र ठाकुर ने कहा कि वह सेब बगीचा देखने गए तो उन्हें एक ही जगह करीब एक किलो गुच्छी मिली है। सचाणी पंचायत के प्रधान योगराज ने कहा कि उनके क्षेत्र में 7,000 रुपये प्रति किलो गुच्छी खरीदी जा रही है।
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गुच्छी को अभी 4,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लिया जा रहा है। 15 मई के बाद इसके दाम में उछाल आ सकता है। इस बार जंगल में लोगों को भारी मात्रा में गुच्छी मिल रही है। इससे कीमत में कमी आई है। कहा कि पिछले कुछ साल पहले उन्होंने गुच्छी को 10,000 से 12,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी खरीदा है।
.............अतुल शर्मा गुच्छी व्यापारी गुशैणी बंजार
गुच्छी के लिए तापमान 17 डिग्री से नीचे चाहिए और इन दिनों गुच्छी के लिए मौसम अनुकूल चल रहा है। इसकी उपज 1,500 से 3,500 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन के अलावा विटामिन बी और डी की मात्रा है। इसके सेवन से दिल की बीमारियां दूर होती हैं और बीमारियों की लड़ने की क्षमता होती है। वहीं गुच्छी का नियमित सेवन से रक्तचाप को भी कंट्रोल करने में मदद करती है। -डा आरके सिंह प्रभारी जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास अनुसंधान संस्थान कुल्लू।