{"_id":"692c7857eeae57e7b2081fe9","slug":"9th-incarnation-of-yugel-rinpoche-reached-shadhabai-gompa-kullu-news-c-89-1-klu1001-163002-2025-11-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: शाढ़ाबाई गोंपा पहुंचे युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: शाढ़ाबाई गोंपा पहुंचे युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार
Sun, 30 Nov 2025 10:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 30 Nov 2025 10:31 PM IST
विज्ञापन
रीति-रिवाज के अनुसार हुआ गोंपा में मुंडन संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बौद्ध धर्मगुरु युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार रविवार को शाढ़ाबाई बौद्ध गोंपा में पहुंचे। यहां बौद्ध धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार चार साल के बालक का मुंडन संस्कार किया गया।
इस दौरान किन्नौर से भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे। मान्यता के अनुसार तिब्बती धर्मगुरु युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार ने हिमाचल में किन्नौर के पूह गांव में दोबारा जन्म लिया हैं। अब बौद्ध धर्म की भी शिक्षा ग्रहण की जाएगी।
किन्नौर से शाढ़ाबाई गोंपा में पहुंचे श्रद्धालु रोशन लाल ने बताया कि सबसे पहले धर्मगुरु युगेल रिंपोछे ने पहला अवतार 1730 में लद्दाख के राज परिवार में लिया था। इसके बाद उन्होंने तिब्बत के बौद्ध महाविहार में शिक्षा हासिल की। धर्मगुरु ने उसके बाद बौद्ध धर्म का प्रचार किया और लोगों को शांत जीवन जीने की भी शिक्षा दी। रमेश कुमार ने बताया कि उसके बाद भी धर्मगुरु ने पुनर्जन्म लिया। आठवें अवतार के दौरान वह किन्नौर के गोंपा में रहे। अब उन्होंने फिर से नौवां अवतार लिया हैं। देछेन छोई खोर महाविहार में उनका मुंडन संस्कार किया गया है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बौद्ध धर्मगुरु युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार रविवार को शाढ़ाबाई बौद्ध गोंपा में पहुंचे। यहां बौद्ध धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार चार साल के बालक का मुंडन संस्कार किया गया।
इस दौरान किन्नौर से भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे। मान्यता के अनुसार तिब्बती धर्मगुरु युगेल रिंपोछे के 9वें अवतार ने हिमाचल में किन्नौर के पूह गांव में दोबारा जन्म लिया हैं। अब बौद्ध धर्म की भी शिक्षा ग्रहण की जाएगी।
विज्ञापन
किन्नौर से शाढ़ाबाई गोंपा में पहुंचे श्रद्धालु रोशन लाल ने बताया कि सबसे पहले धर्मगुरु युगेल रिंपोछे ने पहला अवतार 1730 में लद्दाख के राज परिवार में लिया था। इसके बाद उन्होंने तिब्बत के बौद्ध महाविहार में शिक्षा हासिल की। धर्मगुरु ने उसके बाद बौद्ध धर्म का प्रचार किया और लोगों को शांत जीवन जीने की भी शिक्षा दी। रमेश कुमार ने बताया कि उसके बाद भी धर्मगुरु ने पुनर्जन्म लिया। आठवें अवतार के दौरान वह किन्नौर के गोंपा में रहे। अब उन्होंने फिर से नौवां अवतार लिया हैं। देछेन छोई खोर महाविहार में उनका मुंडन संस्कार किया गया है। संवाद
विज्ञापन