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एनजीटी में करेंगे प्रशासन, नगर परिषद की शिकायत
Updated Fri, 21 Sep 2018 07:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मौहल (कुल्लू)। पिरड़ी में डंपिंग साइट विवाद को लेकर ग्रामीणों का सातवें दिन भी विरोध जारी रहा। ग्रामीणों ने डंपिंग साइट जाने वाली सड़क को बंद कर रखा। डंपिंग साइट में कूड़े के विरोध में बैठे ग्रामीणों के पक्ष में हिमालयन नीति अभियान भी उतर गया है।
अभियान ने कहा कि पिरड़ी डंपिंग साइट में नगर परिषद व प्रशासन ने एनजीटी के आदेशों को नहीं माना है। ऐसे में अब हिमालयन पर्यावरण नीति अभियान सोमवार को एनजीटी में आदेशों को न मानने के बारे में प्रशासन व नगर परिषद की शिकायत करेगा। हिमालयन पर्यावरण नीति अभियान के संयोजक पर्यावरणविद् गुमान सिंह शुक्रवार को पिरड़ी डंपिंग साइट पहुंचे। उन्होंने कूड़ा संयंत्र का जायजा लिया। गुमान सिंह ने कहा कि एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन करना एक अपराध है। साथ ही यह वन भूमि है। 20 सालों से नगर परिषद अवैध रूप से ब्यास नदी के किनारे कूड़ा फेंक कर नियमों की अवहेलना करती रही। इसमें कुल्लू प्रशासन का भी सरेआम हाथ है। गुमान सिंह ने कहा कि उनकी संस्था पिरड़ी डंपिंग साइट की समस्या से जूझ रहे प्रभावितों के साथ है। उन्होंने कहा कि डंपिंग साइट में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। ब्यास नदी का पानी भी प्रदूषित हुआ है। हिमालयन नीति अभियान यहां पर की जाने वाली स्प्रे की दवाइयों की जांच करेगा। प्रशासन पिरड़ी में लगाई गई धारा 144 को हटाए। यह प्रशासन ने नगर परिषद को गलत काम करने की मदद के लिए लगाई है। गौर रहे कि हिमालयन नीति अभियान के चलते ही कुल्लू में लगने वाला स्की विलेज वापस हुआ था। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा था। वन अधिकार समिति के प्रधान जोगिंद्र ने कहा कि ग्रामीण अपने मुद्दे पर अडिग है। डंपिंग के लिए प्रशासन किसी वैकल्पिक जगह की तलाश करें। पिरड़ी में किसी भी हालत में कूड़ा डालने नहीं दिया जाएगा।
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मौहल (कुल्लू)। पिरड़ी में डंपिंग साइट विवाद को लेकर ग्रामीणों का सातवें दिन भी विरोध जारी रहा। ग्रामीणों ने डंपिंग साइट जाने वाली सड़क को बंद कर रखा। डंपिंग साइट में कूड़े के विरोध में बैठे ग्रामीणों के पक्ष में हिमालयन नीति अभियान भी उतर गया है।
अभियान ने कहा कि पिरड़ी डंपिंग साइट में नगर परिषद व प्रशासन ने एनजीटी के आदेशों को नहीं माना है। ऐसे में अब हिमालयन पर्यावरण नीति अभियान सोमवार को एनजीटी में आदेशों को न मानने के बारे में प्रशासन व नगर परिषद की शिकायत करेगा। हिमालयन पर्यावरण नीति अभियान के संयोजक पर्यावरणविद् गुमान सिंह शुक्रवार को पिरड़ी डंपिंग साइट पहुंचे। उन्होंने कूड़ा संयंत्र का जायजा लिया। गुमान सिंह ने कहा कि एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन करना एक अपराध है। साथ ही यह वन भूमि है। 20 सालों से नगर परिषद अवैध रूप से ब्यास नदी के किनारे कूड़ा फेंक कर नियमों की अवहेलना करती रही। इसमें कुल्लू प्रशासन का भी सरेआम हाथ है। गुमान सिंह ने कहा कि उनकी संस्था पिरड़ी डंपिंग साइट की समस्या से जूझ रहे प्रभावितों के साथ है। उन्होंने कहा कि डंपिंग साइट में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। ब्यास नदी का पानी भी प्रदूषित हुआ है। हिमालयन नीति अभियान यहां पर की जाने वाली स्प्रे की दवाइयों की जांच करेगा। प्रशासन पिरड़ी में लगाई गई धारा 144 को हटाए। यह प्रशासन ने नगर परिषद को गलत काम करने की मदद के लिए लगाई है। गौर रहे कि हिमालयन नीति अभियान के चलते ही कुल्लू में लगने वाला स्की विलेज वापस हुआ था। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा था। वन अधिकार समिति के प्रधान जोगिंद्र ने कहा कि ग्रामीण अपने मुद्दे पर अडिग है। डंपिंग के लिए प्रशासन किसी वैकल्पिक जगह की तलाश करें। पिरड़ी में किसी भी हालत में कूड़ा डालने नहीं दिया जाएगा।
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