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सीएमओ ने बिठाई मामले की विभागीय जांच
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में जन्म के बाद नवजात की मौत की स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर भी विभागीय जांच करवाएगा। इसके अलावा निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने तथा दवाओं को बाहर से खरीदने की भी जांच की जाएगी। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने जांच का जिम्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीना लाल तथा डॉ. सपना शर्मा को दिया गया है। दोनों जांच अधिकारियों को यह रिपोर्ट दो दिन में देनी होगी। इसमें जहां अस्पताल के गायनी विशेषज्ञ के बयान लिए जाएंगे वहीं लेबर रूम में तैनात नर्सों और अन्य कर्मचारियों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने वार्ड नर्सों को तलब किया और उनको भी इस मामले की रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने वार्ड नर्सों को अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार तथा उनकी हरसंभव मदद करने को लेकर प्रेरित किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मृतक नवजात 41 सप्ताह और तीन दिन का था। जब गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया, उसे किसी तरह की प्रसव पीड़ा भी नहीं हो रही थी। लिहाजा करीब छह घंटे में होने वाली डिलीवरी मात्र 45 मिनट में हुई। सीएमओ ने कहा कि मामले की विभागीय जांच के लिए दो महिला डॉक्टरों को चुना गया है। उनको जांच की रिपोर्ट दो दिन में देने को कहा गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में जन्म के बाद नवजात की मौत की स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर भी विभागीय जांच करवाएगा। इसके अलावा निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने तथा दवाओं को बाहर से खरीदने की भी जांच की जाएगी। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने जांच का जिम्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीना लाल तथा डॉ. सपना शर्मा को दिया गया है। दोनों जांच अधिकारियों को यह रिपोर्ट दो दिन में देनी होगी। इसमें जहां अस्पताल के गायनी विशेषज्ञ के बयान लिए जाएंगे वहीं लेबर रूम में तैनात नर्सों और अन्य कर्मचारियों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने वार्ड नर्सों को तलब किया और उनको भी इस मामले की रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने वार्ड नर्सों को अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार तथा उनकी हरसंभव मदद करने को लेकर प्रेरित किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मृतक नवजात 41 सप्ताह और तीन दिन का था। जब गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया, उसे किसी तरह की प्रसव पीड़ा भी नहीं हो रही थी। लिहाजा करीब छह घंटे में होने वाली डिलीवरी मात्र 45 मिनट में हुई। सीएमओ ने कहा कि मामले की विभागीय जांच के लिए दो महिला डॉक्टरों को चुना गया है। उनको जांच की रिपोर्ट दो दिन में देने को कहा गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।