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नदी-नालों के पानी से अठखेलियां बन रहीं जानलेवा
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मर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध कुल्लू, मनाली में पर्यटकों की लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित हो रही है। गर्मी के मौसम में मैदानी इलाकों की तपिश से राहत पाने के लिए सैलानी पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।
पहाड़ों में तापमान बढ़ने से आजकल नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में पहाड़ों का रुख करने वाले मैदानी इलाकों के सैलानियों को ठंडक जरूरी मिलती है पर उनको नदियों के पानी का अंदाजा नहीं हो रहा है। वे जान जोखिम में डालकर नदी-नालों के बीच अठखेलियां कर रहे हैं। इससे कई को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। कुल्लू जिला में ही एक सप्ताह के अंदर दो पर्यटकों की नदी में गिरने के बाद डूबकर मौत हुई है। हालांकि यह दोनों मामले पार्वती घाटी के हैं। इसके बावजूद ब्यास नदी में भी पर्यटकों के डूबने के मामले आते हैं। अब सवाल यह उठता है कि इन पर्यटकों को नदी-नालों मेें जाने से कैसे रोका जाए। ऐसा नहीं है कि प्रशासन ने चेतावनी साइन बोर्ड नहीं लगाए हैं। प्रशासन ने अपनी ओर से जगह-जगह पर पर्यटकों को जागरूक करने के लिए साइन बोर्ड लगाए हैं। इसके बाद भी पर्यटक जान जोखिम में डालकर नदी-नालों में उतर रहे हैं। औट से लेकर मनाली तक कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर सैलानियों का जमावड़ा लगा रहता है।
खासकर राफ्टिंग प्वाइंट बबेली, बाशिंग, रायसन बिहाल, वैष्णो माता में सैलानी पानी के बीच मस्ती करते देखे जा सकते हैं। गौर रहे कि चार दिन पहले ही एक चालक पार्वती नदी में फोटो खींचते समय गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा सोमवार को भी एक युवक की नदी में गिरने से मौत हो गई। कुल्लू में हर साल नदी में डूबकर मरने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना चिंता का विषय है। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों को भी इस संबंध में पर्यटकों को जागरूक करने की आवश्यकता है, जिससे इस प्रकार के हादसों से बचा जा सके। उधर, एएसपी कुल्लू राजकुमार चंदेल ने कहा कि पुलिस की ओर से भी नदी-नालों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। पर्यटकों से नदी में पानी के बीच न जाने की अपील की गई है।
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कुल्लू। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध कुल्लू, मनाली में पर्यटकों की लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित हो रही है। गर्मी के मौसम में मैदानी इलाकों की तपिश से राहत पाने के लिए सैलानी पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।
पहाड़ों में तापमान बढ़ने से आजकल नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में पहाड़ों का रुख करने वाले मैदानी इलाकों के सैलानियों को ठंडक जरूरी मिलती है पर उनको नदियों के पानी का अंदाजा नहीं हो रहा है। वे जान जोखिम में डालकर नदी-नालों के बीच अठखेलियां कर रहे हैं। इससे कई को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। कुल्लू जिला में ही एक सप्ताह के अंदर दो पर्यटकों की नदी में गिरने के बाद डूबकर मौत हुई है। हालांकि यह दोनों मामले पार्वती घाटी के हैं। इसके बावजूद ब्यास नदी में भी पर्यटकों के डूबने के मामले आते हैं। अब सवाल यह उठता है कि इन पर्यटकों को नदी-नालों मेें जाने से कैसे रोका जाए। ऐसा नहीं है कि प्रशासन ने चेतावनी साइन बोर्ड नहीं लगाए हैं। प्रशासन ने अपनी ओर से जगह-जगह पर पर्यटकों को जागरूक करने के लिए साइन बोर्ड लगाए हैं। इसके बाद भी पर्यटक जान जोखिम में डालकर नदी-नालों में उतर रहे हैं। औट से लेकर मनाली तक कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर सैलानियों का जमावड़ा लगा रहता है।
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खासकर राफ्टिंग प्वाइंट बबेली, बाशिंग, रायसन बिहाल, वैष्णो माता में सैलानी पानी के बीच मस्ती करते देखे जा सकते हैं। गौर रहे कि चार दिन पहले ही एक चालक पार्वती नदी में फोटो खींचते समय गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा सोमवार को भी एक युवक की नदी में गिरने से मौत हो गई। कुल्लू में हर साल नदी में डूबकर मरने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना चिंता का विषय है। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों को भी इस संबंध में पर्यटकों को जागरूक करने की आवश्यकता है, जिससे इस प्रकार के हादसों से बचा जा सके। उधर, एएसपी कुल्लू राजकुमार चंदेल ने कहा कि पुलिस की ओर से भी नदी-नालों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। पर्यटकों से नदी में पानी के बीच न जाने की अपील की गई है।
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