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वैज्ञानिकों, शोधार्थी पढ़े शोध पत्र
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में शनिवार को आपदा प्रबंधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। भौतिक विभाग एवं विज्ञान भारती हिमाचल प्रदेश के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस सम्मेलन में दूसरे दिन देश भर के विभिन्न बहुप्रतिष्ठित संस्थानों के 20 वैज्ञानिक एवं बुद्धिजीवियों ने विज्ञान, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी विषय पर अपने शोध पत्र पढ़ें।
कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान रोपड़ के प्रोफेसर पीके रैना ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के प्राचार्य डॉ. नंदलाल शर्मा ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से यह सम्मेलन महत्वपूर्ण रहा है। विचार-विमर्श के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वह अति महत्वपूर्ण है। आपदा के समय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। सम्मेलन में कुल 50 शोध पत्र पढ़े गए। रैना ने कहा कि प्राचीन एवं आधुनिक विज्ञान से यह संभव है कि आपदा प्रबंधन को हम घर-घर तक पहुंचाकर मानव एवं जैव विविधता का सही तरीके से संरक्षण कर सकते हैं। डॉ. अनूप कुमार ने पढ़े गए शोधपत्रों और देशभर से आए वैज्ञानिकों के बारे में जानकारी दी। प्रो. रमन शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में जो भी निष्कर्ष निकले हैं, उन्हें आपदा प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार के ध्यान में लाया जाएगा। इस दौरान महाविद्यालय की प्रोफेसर मोनिका रैना, प्रो.केसी शर्मा, डॉ. सूरत ठाकुर, डॉ. गगन राजपूत, प्रो. सोमकृष्ण, प्रो. चेतन राणा, प्रो. अजय कुमार, प्रो. कश्मीर, प्रो. नरेश लाल, प्रो. विवेक, डॉ. पंकज आदि मौजूद रहे।
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कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में शनिवार को आपदा प्रबंधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। भौतिक विभाग एवं विज्ञान भारती हिमाचल प्रदेश के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस सम्मेलन में दूसरे दिन देश भर के विभिन्न बहुप्रतिष्ठित संस्थानों के 20 वैज्ञानिक एवं बुद्धिजीवियों ने विज्ञान, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी विषय पर अपने शोध पत्र पढ़ें।
कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान रोपड़ के प्रोफेसर पीके रैना ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के प्राचार्य डॉ. नंदलाल शर्मा ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से यह सम्मेलन महत्वपूर्ण रहा है। विचार-विमर्श के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वह अति महत्वपूर्ण है। आपदा के समय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। सम्मेलन में कुल 50 शोध पत्र पढ़े गए। रैना ने कहा कि प्राचीन एवं आधुनिक विज्ञान से यह संभव है कि आपदा प्रबंधन को हम घर-घर तक पहुंचाकर मानव एवं जैव विविधता का सही तरीके से संरक्षण कर सकते हैं। डॉ. अनूप कुमार ने पढ़े गए शोधपत्रों और देशभर से आए वैज्ञानिकों के बारे में जानकारी दी। प्रो. रमन शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में जो भी निष्कर्ष निकले हैं, उन्हें आपदा प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार के ध्यान में लाया जाएगा। इस दौरान महाविद्यालय की प्रोफेसर मोनिका रैना, प्रो.केसी शर्मा, डॉ. सूरत ठाकुर, डॉ. गगन राजपूत, प्रो. सोमकृष्ण, प्रो. चेतन राणा, प्रो. अजय कुमार, प्रो. कश्मीर, प्रो. नरेश लाल, प्रो. विवेक, डॉ. पंकज आदि मौजूद रहे।
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